
देहरादून: उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी बीते दो–तीन महीनों से लगातार राजनीतिक दबाव में नजर आ रही है। अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े घटनाक्रम, किसानों से जुड़े मामलों और पार्टी से जुड़े नेताओं के विवादित बयानों ने बीजेपी की मुश्किलें बढ़ाई हैं। इसी बीच गदरपुर विधायक और पूर्व मंत्री अरविंद पांडे से जुड़े घटनाक्रम और पार्टी मुख्यालय पर लगे नए पोस्टरों में प्रदेश प्रभारी की तस्वीर न होने से संगठन और सरकार—दोनों स्तरों पर असहजता की चर्चा तेज हो गई है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद मुख्यमंत्री द्वारा सीबीआई जांच के आदेश से मामला कुछ समय के लिए शांत हुआ, लेकिन बाद में हल्द्वानी क्षेत्र में काशीपुर के किसान की आत्महत्या और अन्य प्रकरणों ने राजनीतिक बहस को फिर हवा दी। इन घटनाओं के बीच पार्टी के भीतर अनुशासन और संदेश प्रबंधन पर सवाल उठने लगे।
अरविंद पांडे प्रकरण से बढ़ी हलचल
बीजेपी के पूर्व मंत्री और वर्तमान गदरपुर विधायक अरविंद पांडे से वरिष्ठ नेताओं की प्रस्तावित मुलाकात की खबर सामने आते ही संगठन से लेकर सरकार तक हलचल मच गई। जब यह शेड्यूल सार्वजनिक हुआ तो इसे भीतरू असंतोष के संकेत के तौर पर देखा गया।
अमित शाह की मौजूदगी में सख्त संदेश
इसी दौरान उत्तराखंड दौरे पर मौजूद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की हरिद्वार में वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक हुई। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, विवादों से दूरी बनाए रखने और अनुशासन के स्पष्ट संदेश दिए गए। इसके बाद अरविंद पांडे से नेताओं की मुलाकात का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।
बीजेपी का पक्ष: ‘सब ठीक है’
बीजेपी विधायक विनोद चमोली ने कहा कि पार्टी में कोई गड़बड़ी नहीं है और आपसी मुलाकातें सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर असंतोष की बातें विपक्ष और मीडिया की व्याख्या भर हैं।
पोस्टर विवाद से नई चर्चा
गुरुवार सुबह उत्तराखंड बीजेपी मुख्यालय पर लगाए गए नए बैनर–पोस्टरों में प्रदेश प्रभारी की तस्वीर न होने से नई बहस छिड़ गई। पहले के पोस्टरों में मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष के साथ प्रभारी और सह प्रभारी की तस्वीरें भी रहती थीं। नए पोस्टर में बदलाव को लेकर राजनीतिक अटकलें तेज हो गईं।
पार्टी की सफाई
बीजेपी प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत भारद्वाज ने इसे पार्टी का प्रोटोकॉल बताया। उनके अनुसार, पोस्टरों में मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के बाद प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय अध्यक्ष की तस्वीरें ही लगाई जाती हैं।
विपक्ष का हमला
कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को बीजेपी की अंदरूनी खींचतान करार दिया। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने कहा कि पोस्टर से प्रदेश प्रभारी की तस्वीर न होना सरकार और संगठन के बीच खटास का संकेत है, और अरविंद पांडे प्रकरण ने पार्टी की अंतर्कलह को उजागर कर दिया है।
आगे क्या होगा
बीजेपी नेतृत्व विवादों से दूरी और अनुशासन के संदेश के साथ स्थिति संभालने की कोशिश में है। आने वाले दिनों में संगठनात्मक गतिविधियों और सार्वजनिक संदेशों के जरिए पार्टी ‘ऑल इज वेल’ का संकेत देने पर फोकस कर सकती है।







