
देहरादून: फ्री डिनर का लालच देकर सस्ते हॉलिडे पैकेज बेचने और लाखों रुपये ऐंठने वाली एक कंपनी पर अब कानून का शिकंजा कस गया है। जिला उपभोक्ता आयोग ने ठगी का शिकार हुए एक ग्राहक को 1.40 लाख रुपये ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही मानसिक पीड़ा के लिए 20 हजार रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 5 हजार रुपये अलग से देने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। आयोग ने कंपनी की नो-रिफंड नीति को अवैध करार देते हुए कहा कि ऐसी शर्तें उपभोक्ता हितों के खिलाफ हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हाल के वर्षों में फ्री डिनर या गिफ्ट के बहाने लोगों को होटल बुलाकर महंगी हॉलिडे मेंबरशिप थमाने की शिकायतें बढ़ी हैं। मौखिक वादों और लिखित शर्तों के बीच अंतर के कारण कई उपभोक्ता आर्थिक नुकसान झेलते हैं। इसी कड़ी में यह मामला उपभोक्ता आयोग के समक्ष पहुंचा।
घटना का विवरण
देहरादून निवासी जितेंद्र कुमार को जनवरी 2022 में कंपनी ने एक होटल में फ्री डिनर पर आमंत्रित किया। वहां सेल्स प्रतिनिधियों ने 10 साल की हॉलिडे मेंबरशिप स्कीम बेचते हुए भरोसा दिलाया कि कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा, पीक सीजन में भी होटल मिलेगा और खाने-पीने पर 30 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इन दावों पर भरोसा कर जितेंद्र कुमार ने अपने क्रेडिट कार्ड से 1.40 लाख रुपये का भुगतान कर दिया।
एग्रीमेंट में बदली शर्तें
भुगतान के तुरंत बाद कंपनी ने बिना पढ़ने का पर्याप्त समय दिए एक छपे हुए एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करवा लिए। बाद में एग्रीमेंट पढ़ने पर सामने आया कि मौखिक वादों के विपरीत हर साल 9,500 रुपये का अनिवार्य मेंटेनेंस चार्ज था और खाने पर छूट जैसी कोई शर्त शामिल नहीं थी। जब ग्राहक ने उसी रात पैसे वापस मांगे, तो कंपनी ने नो-रिफंड पॉलिसी का हवाला देकर इनकार कर दिया।
आधिकारिक जानकारी
मामला जिला उपभोक्ता आयोग, देहरादून के समक्ष पहुंचा, जहां अध्यक्ष पुष्पेन्द्र खरे और सदस्य अल्का नेगी की पीठ ने सुनवाई की। आयोग ने पाया कि कंपनी ने भ्रामक जानकारी देकर ग्राहक से हस्ताक्षर कराए और ऐसी अनुचित शर्तें थोपीं जो कानूनन मान्य नहीं हैं।
आयोग का आदेश
आयोग ने कंपनी को 45 दिनों के भीतर 1.40 लाख रुपये वापस करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही नवंबर 2023 से भुगतान की तिथि तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज, मानसिक परेशानी के लिए 20 हजार रुपये और मुकदमे के खर्च के लिए 5 हजार रुपये देने का आदेश भी दिया गया है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
उपभोक्ताओं का कहना है कि फ्री डिनर और आकर्षक ऑफर के नाम पर लोगों को गुमराह किया जाता है। उनका मानना है कि इस आदेश से ऐसी कंपनियों पर अंकुश लगेगा और उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता मिलेगी।
आगे क्या होगा
आयोग के आदेश के अनुपालन की निगरानी की जाएगी। समयसीमा में भुगतान न होने की स्थिति में कंपनी के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।




