
नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राजकीय इंटर कॉलेजों में कार्यरत सहायक अध्यापक एलटी ग्रेड के प्रोन्नत वेतनमान के पुनर्निर्धारण से जुड़े 18 दिसंबर 2025 के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। न्यायालय ने राज्य सरकार से इस मामले में जवाब दाखिल करने के निर्देश देते हुए अगली सुनवाई के लिए 27 अप्रैल की तिथि तय की है। यह आदेश शिक्षकों के वेतन ढांचे और नियमावली में किए गए संशोधन से जुड़ा है, जिसे लेकर लंबे समय से असंतोष बना हुआ था।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
राज्य में प्रवक्ताओं और सहायक अध्यापक एलटी ग्रेड के वेतनमान को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। वर्ष 2016 की सरकारी सेवक वेतन नियमावली के तहत प्रोन्नत वेतनमान देते समय एक अतिरिक्त इंक्रीमेंट का प्रावधान था। बाद में राज्य सरकार द्वारा 2025 में नियमावली में संशोधन कर इसे 1 जनवरी 2016 से प्रभावी कर दिया गया, जिससे प्रोन्नत वेतनमान पर मिलने वाला एक इंक्रीमेंट समाप्त हो गया। इसी संशोधन को लेकर शिक्षकों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
आधिकारिक जानकारी
मामले की सुनवाई उत्तराखंड हाईकोर्ट की अवकाशकालीन खंडपीठ में न्यायमूर्ति आलोक महरा के समक्ष हुई। याचिकाकर्ताओं सेवक सिंह, गोपाल दत्त पंत, प्रमोद कुमार, धरम राम आर्य, प्यारे लाल साह सहित अन्य प्रवक्ताओं ने 18 दिसंबर 2025 को जारी उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें वित्त सचिव द्वारा संशोधित सरकारी सेवक वेतन नियमावली प्रथम संशोधन 2025 के अनुसार प्रोन्नत वेतनमान का पुनर्निर्धारण करने के निर्देश दिए गए थे।
कोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामले में हस्तक्षेप करते हुए उक्त आदेश पर रोक लगा दी और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।
याचिकाकर्ताओं की दलील
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता ललित सामंत ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार द्वारा किया गया संशोधन केवल शैक्षिक संवर्ग के कर्मचारियों पर लागू किया गया है, जो समानता के सिद्धांत के विपरीत है। उनका कहना था कि 2016 की वेतन नियमावली के तहत प्रोन्नत वेतनमान में देय एक इंक्रीमेंट को राज्य सरकार पिछली तारीख से समाप्त नहीं कर सकती।
स्थानीय प्रतिक्रिया
शिक्षक संगठनों से जुड़े लोगों का कहना है कि इस आदेश से हजारों शिक्षकों के वेतन पर प्रतिकूल असर पड़ता। शिक्षकों ने उम्मीद जताई कि न्यायालय के हस्तक्षेप से उनके अधिकारों की रक्षा होगी और सरकार को नियमों में स्पष्टता लानी पड़ेगी।
आंकड़े / तथ्य
विवाद प्रोन्नत वेतनमान पर दिए जाने वाले एक अतिरिक्त इंक्रीमेंट को लेकर है, जिसे संशोधित नियमावली 2025 के तहत समाप्त कर दिया गया था और इसे 1 जनवरी 2016 से लागू माना गया।
आगे क्या होगा
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया है। अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी, जिसमें सरकार की ओर से दाखिल जवाब और याचिकाकर्ताओं की दलीलों के आधार पर आगे की कार्यवाही तय की जाएगी।







