
ऋषिकेश: कड़ाके की ठंड के बीच जब नलों ने साथ छोड़ा तो जनता की परेशानी सड़कों पर साफ दिखी। नगर निगम क्षेत्र के बापूग्राम से लेकर नंदूफार्म तक करीब 24 घंटे पेयजल आपूर्ति ठप रहने से लोग पानी के लिए सड़क किनारे लगे हैंडपंपों और पड़ोस के ट्यूबवेल पर निर्भर रहे। मंगलवार शाम करीब छह बजे नलों में पानी लौटा, तब जाकर प्रभावित परिवारों की प्यास बुझी और घरों के चूल्हे जल सके। यह संकट इसलिए गंभीर रहा क्योंकि ठंड के मौसम में पानी की कमी ने बच्चों, बुजुर्गों और कामकाजी लोगों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
नगर निगम क्षेत्र के बापूग्राम, बीसबीघा, मीरानगर, गीतानगर, नंदूफार्म समेत कई इलाकों में करोड़ों रुपये की लागत से अर्द्धनगरीय पेयजल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाई गई थी। इसके बावजूद नियमित आपूर्ति न मिल पाने से योजना की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार होने वाली बाधाओं से मूलभूत सुविधा प्रभावित हो रही है।
आधिकारिक जानकारी
अर्द्धनगरीय पेयजल योजना के अधिशासी अभियंता राजेश निरवाल ने बताया कि बापूग्राम, बीसबीघा और गीतानगर क्षेत्रों में सीवर लाइन का कार्य चल रहा है, जिसके कारण पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त हो जाती है। उन्होंने कहा कि मंगलवार शाम करीब छह बजे क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति सुचारु कर दी गई है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय नागरिक संजय, संदीप नेगी, प्रदीप नेगी, गोपाल राणा, नीलम और संगीता ने बताया कि 19 जनवरी की शाम करीब छह बजे से पानी बंद होने के कारण बच्चों और कामकाजी लोगों को बिना नहाए घर से निकलना पड़ा। कई लोग दोपहर तक पानी आने की उम्मीद में इंतजार करते रहे। अंततः लोगों ने पड़ोस के ट्यूबवेल और सड़क किनारे लगे हैंडपंपों से पानी भरकर दैनिक जरूरतें पूरी कीं। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी विभाग लोगों को समय पर पेयजल उपलब्ध नहीं करा पा रहा है।
प्रभाव और परेशानियां
पेयजल आपूर्ति ठप रहने से स्कूली बच्चों को तैयार होने में दिक्कत हुई, जबकि कामकाजी लोगों को समय पर निकलना पड़ा। घरों में खाना पकाने, साफ-सफाई और अन्य जरूरी कार्य प्रभावित रहे। ठंड के मौसम में पानी की कमी ने बुजुर्गों और महिलाओं की परेशानी और बढ़ा दी।
आगे क्या होगा
विभाग का कहना है कि जहां-जहां सीवर लाइन का काम चल रहा है, वहां पेयजल लाइनों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सावधानी बरती जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की बाधाएं न हों। स्थानीय लोग स्थायी समाधान और निर्बाध आपूर्ति की मांग कर रहे हैं।







