
देहरादून: अपनी विभिन्न मांगों को लेकर दून ऑटो रिक्शा यूनियन के पदाधिकारी और सदस्य मुख्यमंत्री आवास कूच के लिए निकले, लेकिन पुलिस बल ने उन्हें ग्लोब चौक के पास ही रोक दिया। इसके बाद ऑटो चालक सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी समस्याएं सामने रखीं। प्रदर्शन के चलते कुछ समय के लिए क्षेत्र में यातायात भी प्रभावित रहा।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
देहरादून में ऑटो रिक्शा चालक लंबे समय से ई-रिक्शा, निजी नंबर प्लेट पर चल रहे दोपहिया वाहनों और परिवहन नीतियों को लेकर असंतोष जता रहे हैं। यूनियन का कहना है कि बदलती नीतियों और अनियंत्रित संचालन से पारंपरिक ऑटो चालकों की आय पर सीधा असर पड़ा है।
यूनियन का आरोप
दून ऑटो रिक्शा यूनियन के अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने कहा कि बीते 55 वर्षों से ऑटो चालक बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और शहर के अन्य चिन्हित स्थानों पर सेवाएं देते आ रहे हैं। नगर निगम द्वारा इन स्थानों पर स्टैंड भी निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ऑटो चालक पर्यटकों और यात्रियों को डोर-टू-डोर सेवा देते हैं और यात्रियों का छूटा हुआ सामान भी ईमानदारी से वापस करते हैं। इसके बावजूद सरकार की नीतियां ऑटो चालकों की रोजी-रोटी पर असर डाल रही हैं।
सीएनजी ऑटो चालकों की परेशानी
यूनियन का कहना है कि शहर में कई प्रकार के वाहनों को संचालन की अनुमति दिए जाने से प्रतिस्पर्धा असंतुलित हो गई है। सीएनजी ऑटो चालकों को पर्याप्त सवारी नहीं मिल पा रही है। इसके साथ ही निजी नंबर प्लेट पर ऑनलाइन माध्यम से वाणिज्यिक सेवा दे रहे दोपहिया वाहनों को लेकर भी ऑटो चालकों ने आपत्ति जताई।
प्रमुख मांगें क्या हैं
ऑटो रिक्शा यूनियन ने सरकार के समक्ष मांग रखी कि इलेक्ट्रिक ऑटो और ई-रिक्शा के पंजीकरण पर कम से कम 10 वर्षों के लिए रोक लगाई जाए, क्योंकि शहर में इनकी संख्या बहुत अधिक हो चुकी है। इसके अलावा ऑटो रिक्शा के 3+1 परमिट की परिधि 25 किलोमीटर से बढ़ाकर 40 किलोमीटर करने या फिर जौलीग्रांट एयरपोर्ट तक सवारी ले जाने की अनुमति देने की मांग की गई।
यूनियन ने यह भी कहा कि मुख्य सड़कों पर चल रहे ई-रिक्शाओं को नियमों के तहत मोहल्लों और गलियों तक सीमित किया जाए। साथ ही फिटनेस सेंटर को देहरादून जिले के केंद्र में लाने, मैन्युअल प्रक्रिया अपनाने या नजदीकी स्थानों पर नए फिटनेस सेंटर खोलने की मांग भी रखी गई।
स्थानीय प्रतिक्रिया
प्रदर्शन में शामिल ऑटो चालकों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। चालकों ने सरकार से संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील भी की।
आगे क्या होगा
यूनियन का कहना है कि प्रशासन से वार्ता के लिए वे तैयार हैं, लेकिन मांगें अनसुनी रहीं तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। पुलिस और प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है।




