
लक्सर: घर में घुसकर नहाती युवती की निजता भंग करने के मामले में लक्सर की सिविल जज एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने मुंडाखेड़ा कला निवासी दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए जेल की सजा और अर्थदंड से दंडित किया है। न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि महिलाओं की गरिमा और निजता से जुड़ी घटनाओं में किसी भी प्रकार की नरमी स्वीकार नहीं की जा सकती।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
यह मामला वर्ष 2015 का है, जो लंबे समय तक न्यायिक प्रक्रिया में रहा। महिला की निजता भंग जैसी घटनाओं पर न्यायालयों की सख्ती को लेकर यह फैसला अहम माना जा रहा है, क्योंकि ऐसे मामलों में पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने में समय लग जाता है।
क्या है पूरा मामला
अभियोजन अधिकारी के अनुसार, 15 अप्रैल 2015 को पीड़िता का पिता खेत पर गया हुआ था। घर पर उसकी दो बेटियां और दृष्टिबाधित दादी मौजूद थीं। दोपहर करीब दो बजे आरोपी पूछताछ के बहाने घर में घुस आए। उस समय घर में कोई पुरुष सदस्य मौजूद नहीं था और युवती स्नान कर रही थी।
आरोप है कि दोनों युवकों ने गलत नीयत से बाथरूम में झांककर युवती की निजता भंग की। इसके बाद उन्होंने युवती के कपड़े उठाकर अश्लील गालियां दीं और मौके से फरार हो गए। शोर सुनकर परिजन और ग्रामीण पहुंचे, लेकिन तब तक आरोपी भाग चुके थे।
पुलिस और न्यायिक कार्रवाई
पीड़िता की तहरीर पर कोतवाली लक्सर में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354 और 504 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान धारा 452 भी जोड़ी गई। न्यायालय में सुनवाई के दौरान धारा 354 को धारा 509 में परिवर्तित किया गया।
अदालत का फैसला
सिविल जज एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट अनुराग त्रिपाठी की अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर गुरुचरणदास पुत्र सुरेश और शुभम पुत्र पप्पू को दोषी ठहराया। अदालत ने दोनों को धारा 452 के तहत दो-दो वर्ष का साधारण कारावास और 500-500 रुपये का अर्थदंड सुनाया। इसके अतिरिक्त धारा 509 के तहत एक-एक वर्ष का साधारण कारावास और 500-500 रुपये जुर्माने की सजा दी गई।
अभियोजन पक्ष की भूमिका
मामले में अभियोजन की ओर से सहायक अभियोजन अधिकारी कपिल पंत ने पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष सभी साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए, जिसके आधार पर न्यायालय ने दोषसिद्धि का आदेश दिया।
आगे क्या होगा
अदालत के फैसले के बाद दोनों दोषियों को सजा भुगतने के लिए जेल भेजा जाएगा। यह फैसला महिला सुरक्षा और निजता के मामलों में एक मजबूत संदेश के रूप में देखा जा रहा है।







