
ऋषिकेश के बापूग्राम क्षेत्र में वन भूमि अतिक्रमण का मुद्दा अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। भूमियाल देवता मंदिर के समीप जुटी बापूग्राम बचाओ संघर्ष समिति ने साफ शब्दों में ऐलान किया कि यह लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है। आंदोलनकारियों का कहना है कि सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष जारी रहेगा और सरकार को इस मुद्दे पर विशेष विधानसभा सत्र बुलाने के लिए मजबूर किया जाएगा। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद क्षेत्र के हजारों परिवारों पर बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे पूरे इलाके में चिंता और आक्रोश का माहौल है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
स्थानीय लोगों का कहना है कि बापूग्राम क्षेत्र में वे 50 से 60 वर्षों से निवास कर रहे हैं। इस दौरान सरकार और प्रशासन द्वारा यहां बिजली, पानी, सड़क, नगर निगम जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। अब वन भूमि से जुड़े आदेशों के चलते अचानक बेदखली की आशंका ने हजारों परिवारों को असमंजस और भय में डाल दिया है। लोगों का तर्क है कि लंबे समय से आबाद इस क्षेत्र को एक झटके में उजाड़ना न्यायसंगत नहीं है।
आधिकारिक जानकारी
आंदोलनकारियों की मांग है कि विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर सदन में एक ठोस प्रस्ताव पारित किया जाए। यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाए, ताकि आबादी वाले इस क्षेत्र को वन संरक्षण अधिनियम से बाहर डी-नोटिफाई कर राजस्व ग्राम घोषित किया जा सके। आंदोलनकारियों ने यह भी मांग रखी कि जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ और भूमि अधिग्रहण पर पूर्ण विराम लगाने की गारंटी सदन में दी जाए। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है और अधिकारी टिप्पणी करने से बचते दिखे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे अपने घरों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक आंदोलन के लिए मजबूर हुए हैं। आंदोलन में शामिल लोगों ने कहा कि यह केवल जमीन का मामला नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य और सम्मान का प्रश्न है। उनका कहना है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
आंकड़े / तथ्य
प्रभावित परिवार: हजारों
निवास अवधि: लगभग 50–60 वर्ष
मुख्य मांग: क्षेत्र का डी-नोटिफिकेशन और राजस्व ग्राम का दर्जा
आंदोलन का स्वरूप: सड़क से सदन तक संघर्ष
आगे क्या होगा
संघर्ष समिति ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में आंदोलन की रूपरेखा और तेज की जाएगी। विशेष सत्र बुलाने की मांग को लेकर जनप्रतिनिधियों से संपर्क बढ़ाया जाएगा। सरकार और प्रशासन की अगली प्रतिक्रिया पर ही यह तय होगा कि आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है।







