
देहरादून: उत्तराखंड में बाहरी राज्यों से बने फर्जी शस्त्र लाइसेंस को वैध कराने का गंभीर मामला सामने आया है। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने ऐसे ही एक शातिर अपराधी को गिरफ्तार किया है, जिसने हरियाणा के सिरसा से फर्जी लाइसेंस बनवाकर पहले मेरठ और फिर देहरादून में ट्रांसफर करवा लिया। हैरानी की बात यह रही कि इस फर्जी लाइसेंस को देहरादून जिलाधिकारी कार्यालय की शस्त्र पंजिका में भी दर्ज करा दिया गया था। इस खुलासे के बाद प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और आशंका जताई जा रही है कि जांच में ऐसे कई और मामले सामने आ सकते हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड में शस्त्र लाइसेंस की प्रक्रिया को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इस मामले ने सिस्टम की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। बाहरी राज्यों के फर्जी दस्तावेजों को वैध बनाकर हथियार रखने की कोशिश न केवल कानून-व्यवस्था के लिए खतरा है, बल्कि यह संगठित अपराध की ओर भी इशारा करता है।
आधिकारिक जानकारी
स्पेशल टास्क फोर्स के एसएसपी नवनीत सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी मनोज मूल रूप से शामली (उत्तर प्रदेश) का निवासी है। पुलिस टीम ने प्रेमनगर क्षेत्र के केहरी गांव में दबिश देकर उसे गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान आरोपी के पास से एक फर्जी शस्त्र लाइसेंस, .30 बोर की अवैध सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और पांच कारतूस बरामद किए गए।
एसटीएफ के अनुसार मनोज एक पेशेवर अपराधी है, जिसके खिलाफ देहरादून के बसंत विहार और प्रेमनगर थानों में जानलेवा हमला, धोखाधड़ी और बलवा सहित तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।
जांच में हुआ बड़ा खुलासा
जांच में सामने आया कि आरोपी ने फर्जी शस्त्र लाइसेंस संख्या 3805 तैयार कराया था। इसे पहले हरियाणा के सिरसा से मेरठ ट्रांसफर दिखाया गया और फिर वर्ष 2020 में मेरठ से देहरादून ट्रांसफर कराकर जिला कार्यालय के रिकॉर्ड में दर्ज करा दिया गया। जब एसटीएफ ने सिरसा प्रशासन से संपर्क किया तो पुष्टि हुई कि वहां से ऐसा कोई लाइसेंस कभी जारी ही नहीं किया गया था। इससे यह स्पष्ट हो गया कि पूरा दस्तावेजी रिकॉर्ड फर्जी था।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस तरह फर्जी लाइसेंस आसानी से वैध कराए जा रहे हैं, तो यह आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
लोगों ने मांग की कि पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
सरकारी कर्मियों की मिलीभगत की जांच
एसटीएफ अब उस सिंडिकेट की तलाश में जुटी है, जिसने जिलाधिकारी कार्यालय के रिकॉर्ड में इस फर्जी लाइसेंस की एंट्री कराई। माना जा रहा है कि बिना विभागीय मिलीभगत के इस तरह का फर्जीवाड़ा संभव नहीं है। एसटीएफ को आशंका है कि उत्तराखंड के अन्य जिलों में भी इस तरह के फर्जी लाइसेंस दर्ज हो सकते हैं, जिनकी बारीकी से जांच की जाएगी।
प्रशासन का पक्ष
देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि दूसरे जिलों और राज्यों से ट्रांसफर होने वाले शस्त्र लाइसेंस संबंधित जिलाधिकारी की एनओसी और स्थानीय पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज किए जाते हैं। इस मामले में किस स्तर पर चूक हुई है, इसकी जांच की जाएगी। पुलिस से लिखित रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
संख्या / तथ्य
आरोपी के पास से एक फर्जी शस्त्र लाइसेंस बरामद किया गया। एक अवैध .30 बोर पिस्टल और पांच कारतूस जब्त किए गए। आरोपी के खिलाफ पहले से तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।
आगे क्या होगा
एसटीएफ अब देहरादून सहित अन्य जिलों की शस्त्र पंजिकाओं की जांच करेगी। साथ ही उत्तर प्रदेश और हरियाणा से जुड़े इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जांच का दायरा बढ़ने से बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।





