
देहरादून के एक बोर्डिंग स्कूल में पढ़ने वाले नाबालिग छात्र के साथ कुकर्म के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए दोषी स्कूल कर्मचारी की सजा बढ़ा दी है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश महेश चंद्र कौशिक की अदालत ने आरोपी को 7 साल के कठोर कारावास और 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह मामला वर्ष 2011 का है, जिसमें पहले आरोपी को दो साल की सजा दी गई थी, लेकिन अपील के बाद अदालत ने दंड को बढ़ाने का आदेश दिया। यह फैसला बच्चों की सुरक्षा और स्कूल परिसरों में अपराधों के प्रति न्यायिक सख्ती को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
मामला वर्ष 2011 का है, जब दिल्ली निवासी एक व्यक्ति ने नगर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी। उनका 13 वर्षीय बेटा देहरादून के एक बोर्डिंग स्कूल में सातवीं कक्षा में पढ़ता था। दीपावली अवकाश के दौरान छात्र अपने चाचा के साथ दिल्ली गया था और 11 नवंबर 2011 को स्कूल वापस लौटने के बाद कथित घटना सामने आई।
आधिकारिक जानकारी
शिकायत के अनुसार, स्कूल कर्मचारी ने छात्र के साथ कुकर्म किया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने 13 नवंबर 2011 को आरोपी को गिरफ्तार किया था। चार महीने जेल में रहने के बाद आरोपी मार्च 2012 में जमानत पर रिहा हुआ। लंबे समय तक चले मुकदमे के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम की अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा सुनाई थी।
स्थानीय / मानवीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूलों और छात्रावासों में बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। इस तरह के मामलों में सख्त सजा से समाज में एक स्पष्ट संदेश जाता है कि नाबालिगों के खिलाफ अपराध किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
कानूनी प्रक्रिया और आंकड़े
करीब 11 वर्षों तक चले इस मुकदमे में अभियोजन पक्ष ने सजा को आजीवन कारावास में बदलने की मांग की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। हालांकि, आरोपी की ओर से दायर अपील को नामंजूर करते हुए अदालत ने सजा बढ़ाकर 7 साल और जुर्माना 15 हजार रुपये कर दिया है। जुर्माना अदा न करने पर दोषी को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
आगे क्या होगा
अदालत ने दोषी को 29 जनवरी को न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। इस फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।






