
ऋषिकेश। विश्व प्रसिद्ध रामझूला पुल की मरम्मत का काम इसी माह से शुरू किया जाएगा। कार्य को पूरा करने की अवधि एक वर्ष तय की गई है, जबकि मरम्मत के दौरान तीन से चार माह तक पुल पर आवाजाही पूरी तरह बंद रहेगी। 1985 में बने इस पुल पर वर्षों से बढ़ते दबाव और बार-बार आई तकनीकी दिक्कतों के बाद अब व्यापक सुधारीकरण किया जा रहा है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
रामझूला गंगा के ऊपर 220 मीटर लंबे स्पान वाला पैदल पुल है, जिसे बाद में दोपहिया वाहनों के लिए भी इस्तेमाल किया जाने लगा। वर्ष 2019 में शासन के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग ने रामझूला और लक्ष्मण झूला का सर्वे कराया था। सर्वे में लक्ष्मण झूला की आयु सीमा पूरी होने पर उसे बंद करने और रामझूला के सुधारीकरण की सिफारिश की गई थी। लक्ष्मण झूला बंद होने के बाद रामझूला पर आवाजाही का दबाव दोगुना हो गया, जिससे पुल असुरक्षित पुलों की सूची में भी शामिल किया गया।
आधिकारिक जानकारी
लोनिवि नरेंद्र नगर ने मरम्मत का प्रस्ताव शासन को भेजा था और बीते वर्ष नवंबर में निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी। अधिशासी अभियंता प्रवीण कर्णवाल के अनुसार करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से मरम्मत कार्य किया जाएगा। इसमें पुल के सस्पेंडर वायर, डैक और टावर समेत प्रमुख संरचनात्मक हिस्सों को बदला जाएगा। कार्य शुरू होते ही सुरक्षा कारणों से तीन से चार माह तक पुल को आम आवाजाही के लिए बंद रखा जाएगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय व्यापारियों और श्रद्धालुओं का कहना है कि पुल बंद रहने की अवधि में वैकल्पिक मार्गों और सूचना व्यवस्था को मजबूत किया जाना जरूरी है, ताकि पर्यटकों और स्थानीय लोगों को कम से कम असुविधा हो।
आंकड़े / तथ्य
रामझूला का निर्माण वर्ष 1985 में हुआ था। मरम्मत कार्य की अनुमानित लागत लगभग 10 करोड़ रुपये है। कार्य अवधि एक वर्ष तय की गई है, जिसमें शुरुआती 3–4 माह पूर्ण बंदी रहेगी।
आगे क्या होगा
मरम्मत के दौरान प्रशासन वैकल्पिक यातायात और पैदल आवागमन की व्यवस्था पर निर्णय लेगा। कार्य पूरा होने के बाद पुल को सुरक्षा मानकों के अनुरूप फिर से खोला जाएगा, जिससे लंबे समय तक सुरक्षित उपयोग संभव हो सके।







