
रामनगर। रामनगर में कोसी नदी में उपखनिज भरान कार्य को लेकर सोमवार को बड़ा विवाद सामने आया, जब बाहर से आए सैकड़ों मजदूरों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। मजदूरों ने आरोप लगाया कि नदी में भारी मशीनों के जरिए उपखनिज भरा जा रहा है, जिससे वर्षों से मैन्युअल तरीके से काम करने वाले श्रमिक बेरोजगार हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इसी काम से उनके परिवारों का पालन-पोषण होता है और मशीनों के इस्तेमाल से उनके सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
कोसी नदी में हर वर्ष उपखनिज भरान के लिए बड़ी संख्या में मजदूर पहुंचते हैं। परंपरागत रूप से यह कार्य मैन्युअल तरीके से किया जाता रहा है, जिससे स्थानीय और बाहर से आए श्रमिकों को रोजगार मिलता था। इस बार मशीनों के उपयोग के आरोपों ने रोजगार और नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आधिकारिक जानकारी
प्रदर्शन कर रहे मजदूरों ने रामनगर उपजिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान प्रशासन को अवगत कराया गया कि नदी में मशीनों का संचालन नियमों के खिलाफ है। रामनगर के उपजिलाधिकारी प्रमोद कुमार ने बताया कि कोसी नदी में बैकहो मशीन चलने से जुड़े वीडियो उनके संज्ञान में आए हैं। इस संबंध में वन विकास निगम उत्तराखंड के संबंधित अधिकारियों को सूचना देकर कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि अवैध खनन को लेकर औचक छापेमारी की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
मजदूरों का कहना है कि उन्होंने काम की उम्मीद में परात, बेलचे और अन्य औजारों पर हजारों रुपये खर्च किए थे, लेकिन मशीनों के कारण उन्हें काम नहीं मिला। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता देव बिष्ट ने बताया कि हर साल कोसी नदी में 50 हजार से एक लाख तक मजदूर उपखनिज भरान के लिए आते हैं, लेकिन इस बार मशीनों के इस्तेमाल से सभी प्रभावित हुए हैं।
राजनीतिक बयान
कांग्रेस के पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तराखंड की नदियों का खनन एक बाहरी कंपनी को दिए जाने के बाद से भारी मशीनों का इस्तेमाल बढ़ा है। उन्होंने दावा किया कि नियमों के अनुसार आपदा की स्थिति को छोड़कर नदी में मशीनों से खुदाई नहीं की जा सकती और मैन्युअल तरीके से सीमित गहराई तक ही कार्य होना चाहिए। उनके अनुसार कोसी नदी में कई स्थानों पर गहरे गड्ढे खोदे गए हैं, जो भविष्य में खतरा बन सकते हैं।
आंकड़े / तथ्य
मजदूरों के अनुसार हर साल 50 हजार से एक लाख श्रमिक उपखनिज भरान कार्य से जुड़े रहते हैं। इस बार मशीनों के उपयोग के आरोपों के चलते बड़ी संख्या में मजदूर बिना काम लौटने को मजबूर हैं।
आगे क्या होगा
प्रशासन ने अवैध खनन के आरोपों की जांच और औचक निरीक्षण का भरोसा दिलाया है। मजदूरों ने मांग की है कि मशीनों के संचालन पर तत्काल रोक लगाई जाए, ताकि उन्हें फिर से मैन्युअल काम मिल सके।






