
ऋषिकेश। बापूग्राम बचाओ संघर्ष समिति के आह्वान पर बापूग्राम भूमियाल देवता के समीप स्थानीय लोगों ने वन विभाग की कार्रवाई के विरोध में सांकेतिक धरना शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों ने शासन-प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए बापूग्राम की भूमि के नियमितीकरण की मांग उठाई। लोगों का कहना है कि खाली भूमि पर फेंसिंग की जा रही है, जबकि वर्षों से क्षेत्रवासी यहां निवासरत हैं। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
बापूग्राम क्षेत्र में लंबे समय से भूमि के स्वामित्व और नियमितीकरण को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि वे वर्षों से यहां रह रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर ठोस निर्णय न होने के कारण आए दिन विवाद और कार्रवाई की स्थिति बन जाती है।
आधिकारिक जानकारी
सोमवार को समिति के संयोजक रमेश जुगलान की अध्यक्षता में कार्यक्रम आयोजित किया गया। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि समिति का प्रतिनिधिमंडल स्थानीय विधायक, सांसद, वन मंत्री और मुख्यमंत्री से मुलाकात कर क्षेत्र की समस्याओं से अवगत कराएगा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि वन विभाग उत्तराखंड की ओर से खाली भूमि पर फेंसिंग की जा रही है, जबकि इस मुद्दे पर सरकार चाहे तो सुप्रीम कोर्ट में क्षेत्रवासियों का पक्ष रख सकती है। अधिकारी इस विषय पर टिप्पणी करने से बचते दिखे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण ही आज सैकड़ों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। उनका आरोप है कि वर्षों से फाइलें लंबित रखी गईं और अब अचानक कार्रवाई से परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।
आंकड़े / तथ्य
स्थानीय निवासियों के अनुसार बापूग्राम क्षेत्र में बड़ी संख्या में परिवार निवास करते हैं और फेंसिंग की कार्रवाई से कई लोगों की पहुंच और आवागमन प्रभावित हो रहा है।
आगे क्या होगा
संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने जल्द भूमि नियमितीकरण को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन उग्र रूप ले सकता है। प्रतिनिधिमंडल की जनप्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी।





