
देहरादून। प्रदेश के अशासकीय वित्त विहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों ने वेतन न मिलने और लंबित मांगों को लेकर सोमवार को मुख्यमंत्री आवास कूच किया। परेड ग्राउंड में एकत्र होकर नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ रहे शिक्षकों को पहले से तैनात पुलिस ने अभिषेक टावर के पास बैरिकेडिंग लगाकर रोक लिया। शिक्षक संघ ने सरकार पर अनुदान बहाली और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े मामलों की अनदेखी का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि यदि मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 26 जनवरी के बाद आंदोलन तेज किया जाएगा। यह प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों की आर्थिक असुरक्षा और नीति स्तर की लंबित फाइलों पर सवाल खड़े करता है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
प्रदेश में वित्तविहीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी लंबे समय से वेतन अनुदान, प्रोत्साहन राशि और आवर्तक सहायता अनुदान से जुड़े मुद्दों को लेकर मांग कर रहे हैं। 2017 के बाद जमा कई फाइलों के निस्तारण न होने से कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ने की बात कही जा रही है।
आधिकारिक जानकारी
प्रदर्शन का नेतृत्व संघ के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र गुसाईं ने किया। उन्होंने कहा कि वेतन अनुदान बहाल करने, प्रोत्साहन धनराशि देने, आवर्तक सहायता अनुदान को निरस्त करने, 2017 के बाद लंबित फाइलों का निस्तारण तथा शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांगें लंबे समय से लंबित हैं। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अभिषेक टावर के पास बैरिकेडिंग कर मार्च को रोक दिया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों का कहना है कि नियमित वेतन न मिलने से परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। उनका आरोप है कि कई बार ज्ञापन देने के बावजूद ठोस निर्णय नहीं हुआ, जिससे आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
आंकड़े / तथ्य
संघ के अनुसार, प्रदेश के कई वित्तविहीन विद्यालयों में शिक्षक महीनों से वेतन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। परेड ग्राउंड से सीएम आवास की ओर कूच में बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल रहे।
आगे क्या होगा
संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया तो 26 जनवरी के बाद प्रदेशभर के वित्तविहीन विद्यालयों में धरना-प्रदर्शन और उग्र आंदोलन किया जाएगा। प्रशासन की ओर से वार्ता या समाधान को लेकर आगे की स्थिति पर नजर बनी हुई है।





