
काशीपुर: किसान सुखवंत सिंह की मौत के बाद काशीपुर का माहौल पूरी तरह गमगीन है। सोमवार सुबह प्रशासन और परिजनों के बीच सहमति बनने के बाद नम आंखों के साथ सुखवंत सिंह के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान, स्थानीय लोग और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता मौजूद रहे। पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल देखने को मिला, वहीं प्रशासन और सरकार से दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग भी उठती रही।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
बीते रविवार 11 जनवरी को हल्द्वानी के एक होटल में काशीपुर निवासी किसान सुखवंत सिंह ने आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले उन्होंने एक वीडियो जारी कर करीब चार करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी और कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे। इस घटना के बाद प्रदेशभर में आक्रोश फैल गया और प्रशासन व सरकार की भूमिका पर सवाल उठने लगे।
अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब
सोमवार सुबह से ही सुखवंत सिंह के आवास पर शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लगा रहा। अंतिम संस्कार के दौरान काशीपुर विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, जसपुर विधायक आदेश चौहान, भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष गुंजन सुखीजा, वरिष्ठ भाजपा नेता आशीष गुप्ता, आईसीसी सदस्य अनुपम शर्मा, पूर्व कांग्रेस महानगर अध्यक्ष मुशर्रफ हुसैन शाहिद समेत कई किसान नेता और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
विपक्ष का तीखा हमला
जसपुर विधायक आदेश चौहान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि सिस्टम द्वारा की गई हत्या है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि प्रशासन और सरकार समय रहते किसान के साथ खड़ी होती, तो शायद आज सुखवंत सिंह जीवित होते। उन्होंने दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के निलंबन के साथ सख्त कार्रवाई की मांग की और कहा कि यदि मजिस्ट्रेट जांच सही दिशा में नहीं चली, तो CBI जांच की मांग की जाएगी।
विधायक चीमा का बयान
काशीपुर विधायक त्रिलोक सिंह चीमा ने इस घटना को अत्यंत दुखद बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री से फोन पर बात की है। विधायक के अनुसार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वरिष्ठ अधिकारी दीपक रावत के नेतृत्व में मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं और उन्हें भरोसा है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
प्रशासनिक कार्रवाई का संदर्भ
इस मामले में उधम सिंह नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की ओर से पहले ही बड़ी कार्रवाई की जा चुकी है। थाना आईटीआई के थानाध्यक्ष और एक उपनिरीक्षक को निलंबित किया गया है, जबकि चौकी पैगा की पूरी टीम को लाइन हाजिर किया गया है। वहीं, मजिस्ट्रेट जांच के जरिए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
आगे क्या
अब सबकी नजर मजिस्ट्रेट जांच की रिपोर्ट पर टिकी है। परिजन, किसान संगठन और राजनीतिक दल स्पष्ट कर चुके हैं कि यदि दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।







