
रुद्रपुर / काशीपुर: हल्द्वानी में आत्महत्या करने वाले काशीपुर निवासी किसान सुखवंत सिंह का शव पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही उनके पैतृक नगर काशीपुर पहुंचा, पूरे इलाके में कोहराम मच गया। बड़ी संख्या में किसान, रिश्तेदार और स्थानीय लोग मौके पर एकत्र हो गए। इस दौरान परिजनों ने सरकार और प्रशासन के सामने तीन अहम मांगें रखीं और तय समयसीमा तक कार्रवाई न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी। हालांकि प्रशासन के साथ हुई वार्ता के बाद दो मांगों पर सहमति बन गई है, जबकि तीसरी मांग को लेकर परिजनों और किसान संगठनों ने दबाव बनाए रखा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उधम सिंह नगर जिले के काशीपुर निवासी किसान सुखवंत सिंह ने बीते दिनों हल्द्वानी के काठगोदाम क्षेत्र स्थित एक होटल में आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले जारी किए गए वीडियो और सुसाइड नोट में उन्होंने कथित जमीन धोखाधड़ी और पुलिस उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। मामला सामने आने के बाद प्रदेशभर में आक्रोश फैल गया और सरकार को मजिस्ट्रेट जांच के आदेश देने पड़े।
परिजनों की तीन प्रमुख मांगें
मृतक के परिजनों ने प्रशासन के समक्ष तीन मांगें रखीं। पहली मांग यह थी कि सुखवंत सिंह द्वारा बनाया गया वीडियो ठोस साक्ष्य माना जाए और उसमें जिन अधिकारियों या अन्य व्यक्तियों पर आरोप लगाए गए हैं, उनके खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। दूसरी मांग में परिजनों ने आरोप लगाया कि उनके साथ बड़े स्तर पर ठगी की गई है, इसलिए दोषियों की संपत्तियां कुर्क कर ठगी की गई पूरी रकम परिवार को वापस दिलाई जाए। तीसरी मांग के तहत प्रशासन को दोपहर 12 बजे तक का अल्टीमेटम दिया गया था, अन्यथा आंदोलन की चेतावनी दी गई।
प्रशासन के साथ वार्ता
परिजनों के अल्टीमेटम के बीच एसडीएम काशीपुर अभय प्रताप सिंह, एसपी काशीपुर स्वप्न किशोर सिंह और एडिशनल एसपी/सीओ दीपक सिंह के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम मृतक के घर पहुंची। लंबी वार्ता के बाद एसपी काशीपुर स्वप्न किशोर सिंह ने बताया कि परिजनों द्वारा रखी गई मांगों को पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं और जो भी उचित कदम होंगे, वे उठाए जाएंगे।
मजिस्ट्रेट जांच और सरकार का रुख
एसडीएम अभय प्रताप सिंह ने बताया कि यह अत्यंत दुखद घटना है, जिस पर स्वयं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संज्ञान लिया है। मामले की मजिस्ट्रेट जांच कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत की अध्यक्षता में शुरू कर दी गई है। परिजनों द्वारा दोषियों पर कार्रवाई और रकम की रिकवरी को लेकर जो मांगें रखी गई हैं, उन पर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की जा रही है।
किसान नेताओं की चेतावनी
किसान नेता जितेंद्र सिंह जीतू ने बताया कि प्रशासन के साथ हुई वार्ता में यह तय हुआ है कि करीब 3 करोड़ 80 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी में से 25 प्रतिशत राशि परिवार को दी जा चुकी है। शेष 75 प्रतिशत रकम की रिकवरी के लिए प्रशासन ने 19 जनवरी तक का समय मांगा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 20 जनवरी को होने वाले भोग से पहले पूरी रकम की रिकवरी नहीं कराई गई, तो हाईवे जाम किया जाएगा।
आगे क्या
फिलहाल प्रशासन और पुलिस दोनों स्तरों पर कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। मजिस्ट्रेट जांच के निष्कर्ष, रकम की रिकवरी और आरोपियों पर दर्ज होने वाले मुकदमों पर अब सबकी नजर टिकी है। वहीं किसान संगठनों और परिजनों ने स्पष्ट कर दिया है कि तय समयसीमा में कार्रवाई न होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।







