
ऋषिकेश वन रेंज में वन विभाग द्वारा चिह्नित 114 भूखंडों में तारबाड़ किए जाने के फैसले पर स्थानीय पार्षदों का विरोध सामने आया है। बापू ग्राम क्षेत्र में कई पार्षदों ने सामूहिक जनसभा कर विभागीय कार्रवाई का विरोध करने का निर्णय लिया। इस बीच शनिवार को वन विभाग और तहसील प्रशासन की टीम ने फिलहाल तारबाड़ की कार्रवाई नहीं करने का फैसला लिया है, हालांकि प्रभावित क्षेत्रों में मुनादी कर लोगों को कार्रवाई में बाधा न डालने की चेतावनी दी जा रही है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
ऋषिकेश वन रेंज के अंतर्गत नगर निगम के कई वार्डों की लीज पर दी गई वनभूमि से जुड़े मामले सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। अदालत के आदेशों के अनुपालन में वन विभाग ने 26 से 28 दिसंबर 2025 के बीच लीज की खाली पड़ी भूमि की नपाई और कब्जा कार्रवाई की थी। इसके बाद विभाग ने बड़े स्तर पर चिह्नित भूखंडों की तारबाड़ कराने का निर्णय लिया।
आधिकारिक जानकारी
वन विभाग के अनुसार कुल 114 बड़े भूखंड चिह्नित किए गए हैं, जिनमें शिवाजीनगर, मीरानगर, बीस बीघा, बापू ग्राम, सुमन विहार, मालवीय नगर, अमित ग्राम पूरब और अमित ग्राम पश्चिम जैसे वार्ड शामिल हैं। विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई अदालत के आदेशों के अनुपालन में की जा रही है।
पार्षदों का विरोध और जनसभा
बापू ग्राम में आयोजित जनसभा में क्षेत्रीय पार्षद मुस्कान चौधरी, अनिल रावत, राजेंद्र सिंह बिष्ट, अभिनव सिंह मलिक सहित अन्य पार्षद शामिल रहे। पार्षदों का कहना है कि आबादी वाले क्षेत्रों में तारबाड़ से स्थानीय लोगों को परेशानी होगी और इस पर व्यापक संवाद के बाद ही कोई कदम उठाया जाना चाहिए।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासियों का कहना है कि लंबे समय से बसे इलाकों में अचानक तारबाड़ की कार्रवाई से असमंजस और भय का माहौल बन रहा है। कुछ लोगों ने अदालत के आदेशों का सम्मान करने की बात कही, वहीं कई नागरिकों ने प्रशासन से पारदर्शिता और संवाद बढ़ाने की मांग की।
आज की स्थिति
आज वन विभाग और तहसील प्रशासन की टीम ने तारबाड़ की कार्रवाई नहीं करने का निर्णय लिया। हालांकि विभागीय टीमें प्रभावित क्षेत्रों में मुनादी कर यह स्पष्ट कर रही हैं कि भविष्य की कार्रवाई में किसी भी प्रकार की बाधा डालने पर सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
आगे क्या होगा
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार आगे की कार्रवाई अदालत के निर्देशों और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए तय की जाएगी। पार्षदों और प्रशासन के बीच संवाद की संभावना भी जताई जा रही है, ताकि विवाद का समाधान निकाला जा सके।







