
नैनीताल/देहरादून: नैनीताल के पैंगोट क्षेत्र में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। संयुक्त अभियान में दो गुलदार की खाल और भारी मात्रा में हड्डियों के साथ एक वन्यजीव तस्कर को गिरफ्तार किया गया है। बरामद खालें करीब छह महीने पुरानी बताई जा रही हैं। एसटीएफ, नैनीताल पुलिस और वन प्रभाग की टीमें आरोपी से पूछताछ कर रही हैं, जबकि तस्करी नेटवर्क में अन्य लोगों की संलिप्तता की भी आशंका जताई जा रही है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड में हाल के वर्षों में वन्यजीव तस्करी के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। खासकर गुलदार जैसे संरक्षित वन्यजीवों के अंगों की तस्करी को लेकर एजेंसियां लगातार सतर्क हैं। इसी क्रम में एसटीएफ को बागेश्वर क्षेत्र से वन्यजीव अंगों की तस्करी से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं मिल रही थीं।
आधिकारिक जानकारी
उत्तराखंड एसटीएफ, नैनीताल पुलिस और नैनीताल वन प्रभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए 9 जनवरी को नैनीताल नगर पालिका रेंज क्षेत्र से आरोपी को गिरफ्तार किया। आरोपी की पहचान महेश सिंह कपकोटी के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बागेश्वर का निवासी है।
बरामदगी का विवरण
टीम ने आरोपी के पास से दो गुलदार की खाल और हड्डियों का जखीरा बरामद किया है। खालों की लंबाई करीब 7 फीट और 6 फीट बताई गई है, जबकि हड्डियों का वजन लगभग साढ़े चार किलो है। प्रारंभिक जांच में यह सामग्री करीब छह महीने पुरानी होने की संभावना जताई गई है।
स्थानीय / मानवीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों और पर्यावरण से जुड़े संगठनों ने कार्रवाई का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इस तरह की तस्करी से जैव विविधता को गंभीर नुकसान पहुंचता है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।
लंबे समय से सक्रिय था तस्कर
जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी लंबे समय से वन्यजीवों के अंगों की तस्करी में शामिल था। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि खालों को किसी बाहरी पार्टी को बेचने की तैयारी थी। टीम यह पता लगाने में जुटी है कि शिकार कब, कहां और किस जंगल में किया गया, तथा इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
अधिकारियों के बयान
नैनीताल वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी आकाश गंगवार ने बताया कि आरोपी पैंगोट क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है और उसके अन्य साथियों की भूमिका भी सामने आई है, जिन पर आगे कार्रवाई होगी।
वहीं एसटीएफ के एसएसपी नवनीत भुल्लर ने कहा कि संयुक्त टीम ने ज्वाइंट ऑपरेशन के तहत बड़ी सफलता हासिल की है और आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
आगे क्या होगा
पूछताछ और तकनीकी जांच के आधार पर तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी। बरामद खालों और हड्डियों को साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखा गया है।






