
देहरादून: उत्तराखंड में यूजेवीएनएल की 304 मेगावाट क्षमता वाली मनेरी भाली-2 जलविद्युत परियोजना को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने परियोजना की हेड रेस टनल की मरम्मत को मंजूरी देते हुए यह स्पष्ट किया है कि इस दौरान बिजली उत्पादन बंद नहीं किया जाएगा। आधुनिक तकनीक की मदद से मरम्मत और जांच का काम समानांतर रूप से किया जाएगा, जिससे राज्य को बड़े राजस्व नुकसान से बचाया जा सकेगा।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
मनेरी भाली-2 परियोजना उत्तराखंड की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में से एक है। वर्ष 2021 से परियोजना की हेड रेस टनल में पानी के रिसाव की समस्या सामने आ रही थी, जो समय के साथ गंभीर होती गई। यदि टनल को पूरी तरह बंद कर मरम्मत की जाती, तो कम से कम छह महीने तक उत्पादन ठप रहता और प्रदेश को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता।
आधिकारिक जानकारी
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग** ने यूजेवीएनएल के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए 12.27 करोड़ रुपये के कार्यों को स्वीकृति दी है। इसके तहत हेड रेस टनल की जांच और भू-सुदृढ़ीकरण का कार्य बिना बिजली उत्पादन रोके किया जाएगा।
टनल में रिसाव क्यों बना चिंता का विषय
मनेरी भाली-2 की हेड रेस टनल का गमरी गाड़ क्षेत्र कम ओवरबर्डन (20–22 मीटर) वाला है और यह सक्रिय श्रीनगर थ्रस्ट के बेहद नजदीक स्थित है। वर्ष 2021 में जहां टनल से पानी का रिसाव 229 लीटर प्रति सेकंड था, वह बढ़कर 1602 लीटर प्रति सेकंड तक पहुंच गया। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे मिट्टी का कटाव और जमीन के भीतर रिक्त स्थान बनने का खतरा बढ़ गया है, जो टनल की संरचनात्मक सुरक्षा और आसपास की भूमि के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
नई तकनीक से होगी जांच और मरम्मत
नियामक आयोग ने रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (आरओवी) के उपयोग को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसके तहत
हेड रेस टनल की जांच के लिए 2.65 करोड़ रुपये और
गमरी गाड़ क्षेत्र में भू-सुदृढ़ीकरण, ग्राउंड विकास व रिसाव जल के चैनलाइजेशन के लिए 9.62 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
आरओवी में हाई-डेफिनिशन कैमरा, सोनार इमेजिंग सिस्टम और डाई इंजेक्शन तकनीक जैसी सुविधाएं होंगी, जिससे दरारों, लीकेज और संरचनात्मक विकृति की सटीक पहचान की जा सकेगी।
आंकड़े / डेटा
यदि टनल को पूरी तरह बंद कर मरम्मत की जाती, तो राज्य को करीब 50 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होता। नई व्यवस्था से यह नुकसान टल गया है। आरओवी आधारित जांच फरवरी 2026 तक पूरी किए जाने की योजना है।
आगे क्या होगा
आरओवी से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर आगे की स्थायी मरम्मत और सुरक्षा उपाय तय किए जाएंगे। तब तक परियोजना से बिजली उत्पादन जारी रहेगा, जिससे राज्य की ऊर्जा आपूर्ति और राजस्व पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।






