
देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड की एसआईटी जांच में गंभीर और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। एसआईटी के एसपी ने बताया कि पुलिस रिमांड के दौरान रिसॉर्ट मालिक और प्रबंधन से जुड़े आरोपितों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अंकिता पर ‘एक्स्ट्रा सर्विस’ देने का दबाव बनाया था। मना करने पर ही इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया गया। कर्मचारियों के बयानों से यह भी पुष्टि हुई कि अंकिता मानसिक रूप से परेशान थी और वहां से जाना चाहती थी, लेकिन उसे जबरन अपने साथ ले जाया गया। यह खुलासा मामले की गंभीरता और जांच के महत्व को और बढ़ाता है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड के सबसे संवेदनशील आपराधिक मामलों में से एक रहा है। समय-समय पर जांच की निष्पक्षता, साक्ष्यों और जिम्मेदारों की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं। एसआईटी द्वारा की जा रही जांच में अब आरोपितों के रिमांड और कर्मचारियों से पूछताछ के आधार पर अहम तथ्य सामने आए हैं।
आधिकारिक जानकारी
एसआईटी के एसपी शेखर सुयाल ने बताया कि पुलिस रिमांड के दौरान रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य, मैनेजर सौरभ भास्कर और असिस्टेंट मैनेजर अंकित गुप्ता ने यह स्वीकार किया कि उन्होंने अंकिता पर ‘एक्स्ट्रा सर्विस’ देने का दबाव बनाया था।
उन्होंने बताया कि किसी भी कर्मचारी ने अंकिता के सुरक्षित लौटने की पुष्टि नहीं की। आरोपितों द्वारा रिमांड के दौरान बताए गए स्थान की निशानदेही के आधार पर ही शव की बरामदगी की गई।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि एसआईटी के खुलासे से यह स्पष्ट होता है कि अंकिता पर लगातार मानसिक दबाव बनाया गया था। लोगों ने मांग की कि मामले में शामिल सभी दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
अन्य अहम तथ्य
एसपी ने बताया कि उर्मिला सनावर को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है, बल्कि जांच में सहयोग के लिए नोटिस जारी किया गया है, जिसका अभी तक कोई उत्तर नहीं मिला है। उनकी ओर से पुलिस से सुरक्षा की मांग की गई है, हालांकि प्रस्तुत पत्र में कोई स्पष्ट पता अंकित नहीं है। वर्तमान में उनके विरुद्ध इस प्रकरण में कोई वारंट जारी नहीं किया गया है। मार्च 2025 के एक पुराने मामले में उनके खिलाफ जारी समन का अंकिता भंडारी प्रकरण से कोई संबंध नहीं है।
आगे क्या होगा
पुलिस ने मीडिया और आमजन से अपील की है कि यदि इस प्रकरण से संबंधित किसी के पास कोई अतिरिक्त साक्ष्य या जानकारी हो, तो वह पुलिस को उपलब्ध कराए। एसआईटी का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष, तथ्यपरक और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप की गई है तथा किसी भी व्यक्ति को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया गया है।






