
हरिद्वार: हरिद्वार नगर निगम से जुड़े कथित जमीन घोटाले के मामले में निलंबित भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। शासन स्तर पर उनके निलंबन की समीक्षा जरूर की गई, लेकिन इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका। खास बात यह है कि समीक्षा से एक दिन पहले ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने संभावित बहाली को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चाओं के केंद्र में आ गया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
बीते वर्ष सामने आए कथित भूमि घोटाले में नगर निगम की जमीन से जुड़े लेनदेन में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे थे। प्रकरण उजागर होते ही जांच के आदेश दिए गए और प्रारंभिक रिपोर्ट में गड़बड़ियों के संकेत मिलने के बाद कड़ी कार्रवाई की गई। इसी क्रम में संबंधित अधिकारियों पर निलंबन की कार्रवाई हुई।
आधिकारिक जानकारी
प्रकरण में तत्कालीन हरिद्वार जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और नगर निगम के तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी को निलंबित किया गया था। इसके अलावा तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह सहित नगर निगम के अन्य कर्मियों पर भी कार्रवाई हुई।
चूंकि दोनों वरिष्ठ अधिकारी ऑल इंडिया सर्विस से जुड़े हैं, इसलिए उनके निलंबन की समय-समय पर शासन स्तर पर समीक्षा अनिवार्य है।
शासन की समीक्षा बैठक
निलंबन को लगभग छह महीने पूरे होने के बीच शासन में बहाली को लेकर मंथन शुरू हुआ। मुख्य सचिव आनंद वर्धन की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में दोनों निलंबित IAS अधिकारियों के मामलों पर विचार किया गया। हालांकि बैठक में किसी तरह का अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका और फिलहाल निलंबन की स्थिति यथावत बनी रही।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने समीक्षा से पहले सरकार पर आरोप लगाया था कि दबाव में आकर दोषियों को राहत देने की तैयारी की जा रही है। उनके इन बयानों के बाद हुई समीक्षा बैठक को राजनीतिक दृष्टि से भी देखा जा रहा है। हालांकि, तमाम अटकलों के बावजूद फिलहाल निलंबित अधिकारियों को कोई राहत नहीं मिल पाई है।
आगे क्या होगा
शासन स्तर पर अगली समीक्षा या जांच की प्रगति के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा। इस बहुचर्चित प्रकरण में अब सभी की निगाहें अगले प्रशासनिक कदम और संभावित अंतिम फैसले पर टिकी हैं।







