
देहरादून: उर्मिला सनावर के वीडियो के बाद फिर चर्चा में आए अंकिता भंडारी हत्याकांड पर शुक्रवार को सरकार की ओर से आधिकारिक बयान आया। कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने देहरादून में प्रेस वार्ता कर सरकार का पक्ष रखा। उनके बयान पर उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
सरकार का पक्ष
सुबोध उनियाल ने कहा कि यदि किसी के पास इस मामले से जुड़े वैध और ठोस सबूत हैं तो वे जांच एजेंसियों के समक्ष रखें। सरकार किसी भी जांच से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने इस प्रकरण को दोबारा उठाया है, उनसे लगातार अपील की जा रही है कि वे प्रमाण पुलिस को दें ताकि विधिसम्मत जांच हो सके।
कांग्रेस का पलटवार
गणेश गोदियाल ने सरकार की प्रेस वार्ता पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार ने आंखों पर पट्टी और कानों में रुई भर ली है, लेकिन मुंह खुला हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि साक्ष्य नष्ट होने की जिम्मेदारी सीधे तौर पर सत्ता से जुड़े लोगों पर आती है और यदि निष्पक्ष जांच हो तो सबूत वहीं से सामने आएंगे। गोदियाल ने मांग की कि इस पूरे प्रकरण की जांच सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई से कराई जानी चाहिए।
वीआईपी विवाद और आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि सरकार कथित वीआईपी की पहचान से अवगत है, लेकिन सबूत नष्ट हो जाने के बाद अब पुख्ता साक्ष्य लाने की चुनौती दी जा रही है। उनके मुताबिक तेज आवाज में बोलने से सत्य सिद्ध नहीं होता, बल्कि पारदर्शी जांच ही सच्चाई सामने ला सकती है।
मामले की पृष्ठभूमि
पौड़ी जिले की रहने वाली अंकिता भंडारी सितंबर 2022 में यमकेश्वर क्षेत्र स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत थीं। 18 सितंबर को वे लापता हुईं और बाद में चीला नहर से उनका शव बरामद हुआ। हत्या के आरोप पुलकित आर्य सहित दो अन्य पर लगे। निचली अदालत ने तीनों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई, जबकि मामले में अपील लंबित है।
क्यों फिर उठा मामला
यह प्रकरण एक बार फिर तब चर्चा में आया जब उर्मिला सनावर के वीडियो में कथित वीआईपी का उल्लेख किया गया। इसी के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई और सरकार व विपक्ष आमने-सामने आ गए।







