
देहरादून: उत्तराखंड के प्रमुख शहरों में लगातार बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए राज्य सरकार एक नई पहल की तैयारी में है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अब बड़े निर्माण कार्यों और व्यावसायिक परियोजनाओं को मंजूरी देने से पहले उनके ट्रैफिक पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शहरी विकास के साथ यातायात व्यवस्था संतुलित रहे और जाम जैसी समस्याएं न बढ़ें। फिलहाल इस दिशा में शुरुआती कसरत चल रही है और जल्द ही नीति का ड्राफ्ट तैयार किए जाने की संभावना है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
राज्य के कई शहरों में बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के कारण सड़कों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। खासकर देहरादून और हल्द्वानी जैसे शहरों में सुबह-शाम जाम आम समस्या बन चुकी है। ट्रैफिक पुलिस की तैनाती, सिग्नल सिस्टम में सुधार और वन-वे व्यवस्था जैसे कदमों के बावजूद यातायात समस्या पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पा रही है।
आधिकारिक जानकारी
मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि विकास कार्यों के साथ यातायात की स्थिति और आम लोगों की सुविधा को समझना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि जिन इलाकों में ट्रैफिक की समस्या अधिक रहती है, वहां स्थानीय जरूरतों और यातायात दबाव को ध्यान में रखकर ही नक्शों को मंजूरी दी जाती है। नई नीति से इस प्रक्रिया को और व्यवस्थित किया जाएगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अनियोजित निर्माण के कारण कई इलाकों में दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है।
व्यापारियों और दैनिक यात्रियों ने उम्मीद जताई है कि यदि निर्माण से पहले ट्रैफिक असर का आकलन किया गया, तो भविष्य में यातायात की समस्याएं कम होंगी।
संख्यात्मक / तथ्यात्मक पहलू
राज्य के शहरी क्षेत्रों में वाहनों की संख्या हर साल तेजी से बढ़ रही है। कई प्रमुख मार्ग ऐसे हैं जहां पहले से ही क्षमता से अधिक ट्रैफिक चल रहा है। ऐसे इलाकों में बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और व्यावसायिक भवन बनने से दबाव और बढ़ने की आशंका रहती है।
आगे क्या होगा
सरकार व्यापक स्तर पर ट्रैफिक सर्वे कराने और जाम वाले क्षेत्रों के चिन्हीकरण की तैयारी कर रही है। यदि यह ट्रैफिक असेसमेंट नीति लागू होती है, तो देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार, रुद्रपुर और हल्द्वानी जैसे शहरों में निर्माण मंजूरी की प्रक्रिया बदलेगी। इससे पार्किंग, सड़क चौड़ीकरण और ट्रैफिक प्रबंधन से जुड़ी जरूरतें पहले ही स्पष्ट हो सकेंगी और शहरी यातायात को अधिक सुगम बनाने में मदद मिलेगी।







