
धर्म डेस्क: हर घर में पूजा-पाठ के बाद एक सवाल अक्सर मन में आता है कि पूजा के बाद बची सामग्री का क्या करें। फूल, माला, हल्दी-कुमकुम, अक्षत और अगरबत्ती जैसी सामग्री श्रद्धा से चढ़ाई जाती है, लेकिन पूजा समाप्त होने के बाद इन्हें कैसे उपयोग में लाया जाए या कैसे विसर्जित किया जाए, इस पर लोग अक्सर असमंजस में रहते हैं।
ऋषिकेश जैसे धार्मिक और आध्यात्मिक शहर में यह सवाल और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन पूजा करते हैं। गलत तरीके से पूजा सामग्री फेंकना न केवल धार्मिक दृष्टि से अनुचित माना जाता है, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाता है। इसलिए यह जरूरी है कि पूजा के बाद बची सामग्री का सही और आसान उपयोग हर व्यक्ति को पता हो।
पूजा के बाद बची सामग्री का सही उपयोग क्यों जरूरी है
पूजा के बाद बची सामग्री का क्या करें यह केवल धार्मिक सवाल नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का विषय भी है। फूल-मालाएं और अन्य प्राकृतिक सामग्री पवित्र मानी जाती हैं। इन्हें कूड़े में फेंकना कई लोगों को मानसिक रूप से भी सही नहीं लगता। साथ ही, प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट के साथ मिलकर ये सामग्री पर्यावरण प्रदूषण बढ़ाती है।
अगर इन्हें सही तरीके से उपयोग या निपटान किया जाए, तो यह श्रद्धा के साथ-साथ प्रकृति के प्रति सम्मान भी दर्शाता है।
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फूल और माला का आसान और उपयोगी प्रयोग
पूजा में चढ़ाए गए फूल और माला को सुखाकर अगरबत्ती या धूप बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। कई लोग इन्हें धूप की तरह जलाते हैं, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। इसके अलावा, सूखे फूलों को पौधों की खाद के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है।
ऋषिकेश में आजकल कई लोग फूलों को पानी में डालकर सीधे गंगा में प्रवाहित करने के बजाय उन्हें मिट्टी में मिलाकर प्राकृतिक खाद बना रहे हैं, जो पर्यावरण के लिहाज से बेहतर तरीका माना जा रहा है।
हल्दी-कुमकुम और अक्षत का सही उपयोग
पूजा के बाद बची हल्दी-कुमकुम को रोजमर्रा के धार्मिक कार्यों में इस्तेमाल किया जा सकता है। हल्दी को स्नान के पानी में मिलाना शुभ माना जाता है, वहीं कुमकुम का उपयोग तिलक या छोटे पूजन में दोबारा किया जा सकता है।
अक्षत यानी बिना टूटे चावल को पक्षियों को खिलाना भी एक अच्छा और पुण्यदायी कार्य माना जाता है। इससे अनाज का सदुपयोग भी होता है और किसी प्रकार का अपमान भी नहीं होता।
अगरबत्ती, दीपक और अन्य सामग्री का क्या करें
जली हुई अगरबत्ती की राख को पौधों की मिट्टी में मिलाया जा सकता है। मिट्टी के दीपक हों तो उन्हें साफ कर दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है या फिर मिट्टी में दबाया जा सकता है। यह तरीका पूरी तरह प्राकृतिक है और किसी भी तरह का नुकसान नहीं करता।
पूजा सामग्री के उपयोग और निपटान का सरल सारांश
| पूजा सामग्री | सही उपयोग या निपटान का तरीका |
|---|---|
| फूल और माला | सुखाकर धूप बनाएं या पौधों की खाद में मिलाएं |
| हल्दी-कुमकुम | तिलक, स्नान या अगली पूजा में दोबारा उपयोग |
| अक्षत | पक्षियों को खिलाएं या धार्मिक उपयोग में लें |
| अगरबत्ती की राख | पौधों की मिट्टी में मिलाएं |
| मिट्टी के दीपक | साफ कर पुनः उपयोग करें या मिट्टी में दबाएं |
आज का अपडेट: बदलती सोच और स्थानीय पहल
आज के समय में ऋषिकेश सहित कई धार्मिक शहरों में पूजा सामग्री के पर्यावरण-अनुकूल निपटान पर जोर दिया जा रहा है। लोग अब गंगा में पूजा सामग्री प्रवाहित करने से बच रहे हैं और स्थानीय स्तर पर जैविक निपटान को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह बदलाव आने वाले समय में और मजबूत होने की उम्मीद है।
पूजा के बाद बची सामग्री का क्या करें इसका जवाब सरल है—श्रद्धा और समझदारी के साथ उसका उपयोग करें। फूल, माला और हल्दी-कुमकुम जैसी सामग्री का सही तरीके से पुनः उपयोग न केवल धार्मिक दृष्टि से उचित है, बल्कि पर्यावरण की रक्षा भी करता है। छोटे-छोटे प्रयासों से हम पूजा को अधिक पवित्र और जिम्मेदार बना सकते हैं।







