
देहरादून: उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में लगातार बढ़ रही भालुओं की गतिविधियों के बीच चमोली जिले के पोखरी क्षेत्र में दहशत का कारण बने काले हिमालयन भालू को वन विभाग की टीम ने पिंजरे में कैद कर देहरादून लाया है। इस भालू को देहरादून चिड़ियाघर के सुरक्षित बाड़े में रखा गया है, जहां उसके स्वभाव, स्वास्थ्य और व्यवहार पर लगातार निगरानी की जा रही है। हाल के दिनों में भालू के हमलों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए यह कार्रवाई मानव और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड के कई पर्वतीय जिलों में इन दिनों भालुओं की दहशत बनी हुई है। भोजन की कमी और प्राकृतिक आवास में बदलाव के चलते भालू बार-बार आबादी वाले इलाकों की ओर आ रहे हैं। चमोली जिले के पोखरी क्षेत्र में भी काले हिमालयन भालू की सक्रियता से ग्रामीण लंबे समय से भयभीत थे, जिसके बाद वन विभाग को उसे पकड़ने की कार्रवाई करनी पड़ी।
भालू को कहां रखा गया
पकड़े गए भालू को देहरादून स्थित देहरादून चिड़ियाघर में सुरक्षित बाड़े में छोड़ा गया है। यहां उसे पर्यटकों के लिए प्रदर्शित नहीं किया जाएगा। चिड़ियाघर प्रशासन के अनुसार फिलहाल कुछ दिनों तक भालू को यहीं रखकर उसके व्यवहार का अध्ययन किया जाएगा।
आधिकारिक जानकारी
देहरादून चिड़ियाघर के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डा. प्रदीप मिश्रा ने बताया कि भालू पूरी तरह शांत है और सामान्य व्यवहार कर रहा है। उसे फल और सब्जियां दी जा रही हैं, जिनमें अमरूद उसे सबसे अधिक पसंद आ रहा है। इसके अलावा उसके आहार में सेब, खीरा और गाजर भी शामिल किए गए हैं।
भालू की स्थिति और निगरानी
करीब साढ़े पांच फीट लंबा और लगभग 110 किलोग्राम वजनी यह काला हिमालयन भालू फिलहाल स्वस्थ है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इंसानों को अचानक देखकर भालू में आत्मरक्षा की प्रवृत्ति बनी रह सकती है। इसी वजह से उसके खानपान, दिनचर्या और नाइट शेल्टर में आराम की व्यवस्थाओं पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
पोखरी क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि भालू की मौजूदगी से लंबे समय से डर का माहौल था।
स्थानीय लोगों ने राहत जताई कि भालू को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया गया है, जिससे अब गांवों में जनहानि की आशंका कम हुई है।
भालू गांवों की ओर क्यों आ रहे हैं
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार ऊंचाई वाले क्षेत्रों में काले हिमालयन भालुओं को अब पर्याप्त प्राकृतिक भोजन नहीं मिल पा रहा है। बांज के बीज, रिंगाल की पत्तियां और अन्य जंगली फल-फूल सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन भी इस समस्या का बड़ा कारण हो सकता है, जिसके चलते मानव-भालू संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं।
आंकड़े / तथ्य
यह भालू लगभग 110 किलो वजनी है।
लंबाई करीब साढ़े पांच फीट बताई गई है।
पिछले कुछ समय में पर्वतीय क्षेत्रों में भालू हमलों की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
आगे क्या होगा
चिड़ियाघर प्रशासन के अनुसार राष्ट्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से अनुमति मिलने की स्थिति में इस काले हिमालयन भालू को देहरादून में स्थायी रूप से रखा जा सकता है। तब तक उसे सुरक्षित बाड़े में रखकर लगातार निगरानी जारी रहेगी। वन विभाग का कहना है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए आगे भी ऐसे कदम उठाए जाएंगे।






