
मसूरी: संस्कृति, संगीत और प्रकृति के अद्भुत संगम के रूप में आयोजित मसूरी कार्निवाल एक बार फिर लोगों की यादों में खास जगह बना गया। ‘पहाड़ों की रानी’ मसूरी में चल रहे इस भव्य आयोजन ने न केवल स्थानीय नागरिकों बल्कि देश-विदेश से आए पर्यटकों को भी उत्तराखंड और अन्य राज्यों की समृद्ध लोक परंपराओं से रूबरू कराया। कार्निवाल के चौथे दिन आयोजित मिक्स फोक म्यूजिकल नाइट में लोक संगीत की ऐसी रंगीन शाम सजी कि दर्शक देर रात तक झूमते नजर आए।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
मसूरी कार्निवाल बीते कुछ वर्षों में केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम न रहकर पर्यटन और स्थानीय पहचान का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। हर साल आयोजित होने वाला यह कार्निवाल उत्तराखंड की संस्कृति के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों की लोक कलाओं को भी एक मंच पर प्रस्तुत करता है।
हिमाचली लोक संगीत ने बांधा समां
मिक्स फोक म्यूजिकल नाइट में हिमाचली लोक गायक विक्की चौहान की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही। ‘गोरी तेरी चोली’, ‘पहेड़ी वादी’ और ‘झूमके-झूमके’ जैसे लोकप्रिय गीतों पर पूरा पंडाल तालियों और उत्साह से गूंज उठा। लोक धुनों पर दर्शक देर रात तक थिरकते रहे और कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह उत्सवमय बन गया।
कलाकार की भावनात्मक प्रतिक्रिया
मंच से बात करते हुए विक्की चौहान ने कहा कि उनके संगीत करियर की शुरुआत मसूरी से ही हुई थी और उसी शहर में प्रस्तुति देना उनके लिए गर्व और आत्मीय अनुभव है। उन्होंने नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी और स्थानीय प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि कार्निवाल में बार-बार आमंत्रित किया जाना उनके लिए सम्मान की बात है।
अवध-भोजपुरी और कव्वाली की प्रस्तुति
कार्यक्रम में सुरेश कुशवाह और उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत अवध-भोजपुरी गीतों और कव्वाली ने भी दर्शकों का दिल जीत लिया। उनकी प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि मसूरी कार्निवाल केवल पहाड़ी संस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की विविध लोक परंपराओं को एक साथ जोड़ने वाला मंच है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों और पर्यटकों का कहना है कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजनों से मसूरी की अलग पहचान बनती है। पर्यटकों ने बताया कि कार्निवाल के कारण उन्हें एक ही स्थान पर विभिन्न राज्यों की लोक संस्कृति देखने और सुनने का अवसर मिल रहा है।
प्रशासन का पक्ष
नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने कहा कि मसूरी कार्निवाल अब स्थानीय कलाकारों, पर्यटन और रोजगार को नई दिशा देने वाला मंच बन चुका है। वहीं एसडीएम मसूरी राहुल आनंद ने बताया कि कार्निवाल से पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है और इससे स्थानीय व्यापारियों, कलाकारों और कारीगरों को आर्थिक संबल मिल रहा है।
आगे क्या होगा
प्रशासन के अनुसार आने वाले दिनों में कार्निवाल के तहत और भी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे मसूरी की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सके।







