
देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों सोशल मीडिया से जुड़ा एक एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) जनरेट वीडियो बड़ा विवाद बन गया है। इस वीडियो में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की तस्वीर का इस्तेमाल करते हुए बैकग्राउंड में एक विशेष ऑडियो जोड़ा गया है, जिसे भाजपा ने कांग्रेस की कथित तुष्टिकरण राजनीति का उदाहरण बताया है। वहीं कांग्रेस ने इसे समाज को बांटने की साजिश करार दिया है। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब राज्य में आगामी 2027 विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होती जा रही हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित यह एआई जनरेट वीडियो उत्तराखंड भाजपा के आधिकारिक एक्स अकाउंट से साझा किया गया बताया जा रहा है। वीडियो में पूर्व मुख्यमंत्री की छवि को एक खास राजनीतिक नैरेटिव के साथ प्रस्तुत किया गया है। इसी को लेकर कांग्रेस ने आपत्ति जताते हुए इसे फर्जी और भ्रामक प्रचार बताया है, जबकि भाजपा इसे राजनीतिक विमर्श का हिस्सा मान रही है।
आधिकारिक जानकारी
इस मामले में हरीश रावत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लेकर उनके खिलाफ झूठा नैरेटिव गढ़ा जा रहा है। उन्होंने मांग की कि भाजपा सार्वजनिक रूप से माफी मांगे और वीडियो को तत्काल हटाए। हरीश रावत ने चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर वह थाने में एफआईआर दर्ज कराने के साथ-साथ साइबर क्राइम के तहत भी कार्रवाई के लिए आवेदन करेंगे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
राजनीतिक हलकों में इस वीडियो को लेकर चर्चा तेज है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए इस तरह के वीडियो से आम जनता में भ्रम की स्थिति पैदा होती है और राजनीतिक माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो जाता है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा के नेताओं से जुड़े कई एआई जनरेट वीडियो पहले भी वायरल होते रहे हैं, लेकिन उस समय कांग्रेस ने कभी आपत्ति नहीं जताई। उन्होंने कहा कि जब हरीश रावत से जुड़ा ऑडियो सामने आता है, तो उसे एआई बताया जा रहा है, जबकि पूर्व में कांग्रेस ऐसे दावों को नकारती रही है।
संख्या / तथ्य
यह विवाद पूरी तरह सोशल मीडिया पर प्रसारित एक एआई वीडियो से जुड़ा है, जिसे लेकर दोनों दल आमने-सामने हैं। मामला 2027 विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
हरीश रावत ने स्पष्ट किया है कि यदि वीडियो हटाया नहीं गया, तो वह लगातार सात दिनों तक भाजपा कार्यालय जाकर इस मुद्दे को उठाएंगे। वहीं भाजपा ने इसे राजनीतिक आलोचना का विषय बताते हुए जनता पर फैसला छोड़ने की बात कही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।







