
देहरादून: जिला अदालत ने पनीर में मिलावट के मामले में एक डेयरी के संचालक और पेशे से वकील अलीशेर कुरैशी को दोषी ठहराते हुए एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अभियुक्त ने अदालत में अपना जुर्म स्वीकार किया और अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए कम सजा की मांग की। मामले में अदालत ने जेल भेजने के बजाय भारी जुर्माना और प्रतीकात्मक कारावास की सजा देना उचित माना, ताकि खाद्य सुरक्षा के प्रति सख्त संदेश दिया जा सके।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
खाद्य पदार्थों में मिलावट के मामलों को लेकर जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग लगातार सख्ती बरत रहा है। मिलावटी और असुरक्षित खाद्य सामग्री न केवल उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए खतरा होती है, बल्कि यह कानूनन गंभीर अपराध भी है। इसी कड़ी में अजबपुर खुर्द क्षेत्र की एक डेयरी से जुड़ा यह मामला अदालत में विचाराधीन था।
आधिकारिक जानकारी
पंचम अपर सिविल जज अमित कुमार ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि अभियुक्त के संतुलित भविष्य को ध्यान में रखते हुए उसे एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में जीवन जीने का अवसर दिया जाना विधि सम्मत होगा। अदालत ने बुधवार को दिए फैसले में अभियुक्त को जेल भेजने के बजाय जुर्माने और प्रतीकात्मक सजा से दंडित किया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट पर सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।
कुछ लोगों ने अदालत के फैसले को चेतावनी भरा संदेश बताते हुए कहा कि इससे अन्य कारोबारियों में भी डर बनेगा।
संख्या / आंकड़े
मानकों के विपरीत पनीर बेचने पर 80 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
असुरक्षित खाद्य पदार्थ के लिए 20 हजार रुपये का अतिरिक्त दंड दिया गया।
जुर्माना न भरने की स्थिति में 6 माह का साधारण कारावास भुगतना होगा।
आगे क्या होगा
खाद्य सुरक्षा विभाग का कहना है कि ऐसे मामलों में निरीक्षण और सैंपलिंग की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। विभाग का उद्देश्य मिलावटी खाद्य पदार्थों पर रोक लगाकर आम लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।






