
देहरादून: प्रेमनगर थाना क्षेत्र के सुद्धोवाला में किरायेदार बनकर आए एक दंपती ने मकान मालकिन के घर से जेवरात और नकदी चोरी कर फरार होने का मामला सामने आया है। मकान मालकिन के बाहर जाने का फायदा उठाते हुए आरोपितों ने वारदात को अंजाम दिया। चोरी गए जेवरात और नकदी की कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है। पुलिस ने अज्ञात आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
प्रेमनगर क्षेत्र में किराये पर मकान लेने के नाम पर ठगी और चोरी की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। पुलिस बार-बार किरायेदार सत्यापन पर जोर देती रही है, लेकिन कई बार भरोसे के चलते सत्यापन में देरी हो जाती है, जिसका फायदा अपराधी उठा लेते हैं।
आधिकारिक जानकारी
पुलिस के अनुसार 9 दिसंबर को एक महिला और पुरुष सुद्धोवाला क्षेत्र में किराये का कमरा तलाशते हुए गीता देवी के मकान पहुंचे। दोनों ने खुद को नवविवाहित दंपती बताया। मकान मालकिन के पति सेना में हैं। आरोपितों ने सत्यापन के लिए दस्तावेज देने का आश्वासन दिया और कहा कि वे एक-दो दिन में सामान व कागजात लेकर आएंगे। भरोसा कर उन्हें कमरा दे दिया गया।
वारदात कैसे हुई
12 दिसंबर को गीता देवी किसी काम से बाहर गई थीं। लौटने पर उन्होंने देखा कि कमरे का सामान बिखरा पड़ा है और किरायेदार दंपती गायब है। उसी कमरे में गीता देवी का पर्स पड़ा मिला, जिसमें रखे जेवर और नकदी गायब थे।
चोरी का विवरण
पर्स में रखे गए सामान में सोने की तीन अंगूठियां, कान की चार बालियां, सोने की तीन चेन, दो कुंडल, सोने की लौंग, तीन जोड़ी चांदी की पायल, चार जोड़ी बिछिया और 15 हजार रुपये नकद शामिल थे। कुल मिलाकर चोरी गई संपत्ति की कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि किरायेदार बनकर ठगी की घटनाएं बढ़ रही हैं और सत्यापन में जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है।
पड़ोसियों ने बताया कि घटना के बाद क्षेत्र में सतर्कता बढ़ी है और लोग अब बिना सत्यापन किसी को कमरा देने से बच रहे हैं।
पुलिस की कार्रवाई
सूचना पर प्रेमनगर थाना पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है।
झाझरा चौकी प्रभारी अमित कुमार शर्मा ने बताया कि आरोपितों की तलाश जारी है, हालांकि अभी तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। आरोपित ने अपना नाम नीरज बताया था, लेकिन कोई दस्तावेज नहीं दिए गए, जिससे फर्जी पहचान की आशंका है।
आगे क्या?
पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपितों की पहचान करने में जुटी है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि किरायेदार रखने से पहले अनिवार्य रूप से पुलिस सत्यापन कराएं।






