
चमोली: हिमगिरी प्लांटेशन घोटाले के एक बड़े मामले में चमोली पुलिस को अहम सफलता मिली है। पैसा दोगुना करने और आकर्षक ब्याज का लालच देकर आम लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाला आरोपी 25 वर्षों की फरारी के बाद आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बाहर था और उस पर इनाम भी घोषित था। पुलिस ने उसे रुद्रप्रयाग जिले के फाटा क्षेत्र से दबोचा है। इस गिरफ्तारी से वर्षों से न्याय की आस लगाए बैठे पीड़ितों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हिमगिरी प्लांटेशन घोटाला उत्तराखंड के चर्चित निवेश घोटालों में शामिल रहा है। वर्ष 1990 के दशक में कई फर्जी कंपनियों ने कम समय में पैसा दोगुना करने का लालच देकर ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों से निवेश कराया था। बाद में ये कंपनियां निवेशकों का पैसा लेकर फरार हो गईं। हिमगिरी प्लांटेशन भी इसी कड़ी का एक मामला रहा, जिसकी शिकायत वर्ष 2001 में दर्ज कराई गई थी।
आधिकारिक जानकारी
पुलिस के अनुसार वर्ष 2001 में शिव प्रसाद निवासी कालीमठ, जनपद रुद्रप्रयाग की तहरीर पर थाना गोपेश्वर में गंभीर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया था। शिकायत में बताया गया कि रविंद्र मोहन पुत्र शेर सिंह राणा और उसका भाई राकेश मोहन, निवासी ग्राम जामू, थाना गुप्तकाशी ने वर्ष 1993 में हिमगिरी प्लांटेशन नाम से कंपनी स्थापित की थी। दोनों ने निवेशकों को कम समय में धनराशि दोगुनी करने का झांसा देकर बड़ी रकम जमा कराई और वर्ष 2001 में लाखों रुपये लेकर फरार हो गए।
इस मामले में थाना गोपेश्वर पर मु.अ.सं. 268/2001 और 269/2001, धारा 406/420 भादवि के तहत मुकदमे दर्ज किए गए थे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
पीड़ित परिवारों का कहना है कि वर्षों तक मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा, लेकिन अब गिरफ्तारी से न्याय की उम्मीद जगी है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई से भविष्य में ठगी पर रोक लगेगी।
गिरफ्तारी कैसे हुई
कोर्ट द्वारा दोनों अभियुक्तों को मफरूर घोषित कर उनके खिलाफ स्थायी गैर-जमानती वारंट जारी किए गए थे। फरारी के चलते रविंद्र मोहन पर ₹5000 का इनाम भी घोषित किया गया था। पुलिस अधीक्षक चमोली सुरजीत सिंह पंवार के निर्देश पर उपनिरीक्षक सतेन्द्र बुटोला के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई।
टीम ने तकनीकी विश्लेषण, विभिन्न अभिलेखों, देशव्यापी रिकॉर्ड और NATGRID प्लेटफॉर्म के माध्यम से आरोपी की तलाश तेज की। जांच में दिल्ली और नोएडा से जुड़े पते सामने आए, जहां पुलिस टीम भेजी गई। लगातार प्रयासों के बाद आरोपी को उसके गृह क्षेत्र की ओर आते समय फाटा से गिरफ्तार कर लिया गया।
आंकड़े / तथ्य
घोटाले की शुरुआत वर्ष 1993 में हुई।
मुकदमे दर्ज हुए वर्ष 2001 में।
आरोपी 25 वर्षों से फरार था।
गिरफ्तार आरोपी पर ₹5000 का इनाम घोषित था।
आगे क्या?
गिरफ्तार अभियुक्त को नियमानुसार न्यायालय में पेश कर दिया गया है। वहीं, इस मामले में फरार दूसरे मुख्य अभियुक्त राकेश मोहन की गिरफ्तारी के लिए पुलिस का सघन अभियान जारी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही उसे भी पकड़ लिया जाएगा।






