
देहरादून: दिल्ली में रविवार को आयोजित कांग्रेस की रैली को लेकर सियासी विवाद गहराता जा रहा है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विवादित नारे लगाए गए। इस मुद्दे पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। मुख्यमंत्री के बयान के बाद कांग्रेस की ओर से प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी प्रतिक्रिया दी है और आरोपों को सिरे से खारिज किया है। दोनों दलों के बीच बयानबाज़ी तेज होने से यह मामला अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
दिल्ली में 14 दिसंबर को आयोजित कांग्रेस की रैली के बाद से राजनीतिक हलकों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। बीजेपी का दावा है कि रैली के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए गए, जबकि कांग्रेस इसे पूरी तरह निराधार बता रही है। इससे पहले भी राजनीतिक मंचों और रैलियों में भाषा के स्तर को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं।
आधिकारिक जानकारी
बीजेपी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कांग्रेस अपने नेतृत्व के इशारे पर जिस तरह की भाषा का प्रयोग कर रही है, उसका न तो समाज में और न ही राजनीति में कोई स्तर है। उन्होंने कहा कि चाहे प्रधानमंत्री की दिवंगत माता को लेकर टिप्पणी का मामला हो या फिर दिल्ली रैली में प्रधानमंत्री के लिए कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग, यह कांग्रेस की हताशा और निराशा को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जनता लगातार कांग्रेस को नकार रही है, इसी वजह से पार्टी अनर्गल बयानबाज़ी कर रही है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे बयान चुनावी माहौल में दलों की रणनीति का हिस्सा होते हैं।
कुछ नागरिकों ने बताया कि राजनीतिक दलों को आरोप-प्रत्यारोप से इतर जनहित के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
कांग्रेस का पक्ष
मुख्यमंत्री के बयान के बाद उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आरोपों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि 14 दिसंबर को दिल्ली में वोटों की गड़बड़ियों के खिलाफ आयोजित कांग्रेस रैली में प्रधानमंत्री के लिए किसी भी तरह के अपशब्द नहीं कहे गए। गोदियाल ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस के किसी भी मंच से अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं किया जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी कुछ लोगों को रैलियों में भेजकर इस तरह की बयानबाज़ी करवाने के लिए कुख्यात रही है। उनका कहना था कि यदि मंच से कुछ कहा जाता तो कांग्रेस प्रतिक्रिया देती, लेकिन गली-कूचों में कही गई बातों की जिम्मेदारी कांग्रेस की नहीं है।
आंकड़े / तथ्य
रैली 14 दिसंबर को दिल्ली में आयोजित हुई।
मुद्दा प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित नारेबाज़ी से जुड़ा है।
दोनों दलों की ओर से आधिकारिक बयान सामने आए हैं।
आगे क्या?
इस राजनीतिक विवाद पर आने वाले दिनों में दोनों दलों की ओर से और प्रतिक्रियाएं आ सकती हैं। फिलहाल मामला बयानबाज़ी तक सीमित है, लेकिन यह बहस राजनीतिक मंचों पर जारी रहने की संभावना है।






