
देहरादून: पवित्र धाम केदारनाथ और हेमकुंड साहिब की यात्रा को अधिक सुरक्षित, सुगम और आधुनिक बनाने की दिशा में उत्तराखंड एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है। सोनप्रयाग-केदारनाथ और गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाओं में देश में पहली बार अत्याधुनिक ट्राई-केबल डिटैचेबल गोंडोला रोपवे तकनीक (3एस) का उपयोग किया जाएगा। यह तकनीक तेज हवा और विषम मौसम में भी रोपवे के सुरक्षित संचालन की क्षमता रखती है। अभी तक यह प्रणाली विश्व के कुछ चुनिंदा देशों में ही इस्तेमाल हो रही है। रोपवे के निर्माण से तीर्थयात्रियों की यात्रा का समय काफी कम होगा और कठिन पैदल मार्ग से राहत मिलेगी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
केदारनाथ और हेमकुंड साहिब देश के सबसे कठिन लेकिन आस्था से जुड़े तीर्थ स्थलों में शामिल हैं। मौजूदा समय में इन धामों तक पहुंचने के लिए यात्रियों को लंबा पैदल मार्ग या खड़ी चढ़ाई तय करनी पड़ती है, जो बुजुर्गों और बीमार श्रद्धालुओं के लिए चुनौतीपूर्ण होती है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने आधुनिक रोपवे परियोजनाओं को मंजूरी दी है, ताकि यात्रा को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया जा सके।
आधिकारिक जानकारी
उत्तराखंड में सोनप्रयाग-केदारनाथ और गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाओं में 3एस (ट्राई-केबल डिटैचेबल गोंडोला) तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। इस तकनीक में तीन अलग-अलग स्टील केबल का उपयोग होता है। दो स्थिर केबल गोंडोला के पूरे भार को संभालते हैं, जबकि तीसरा चलायमान केबल उसे आगे-पीछे खींचता है। इससे तेज हवा, बर्फबारी और खराब मौसम में भी केबिन पूरी तरह संतुलित रहते हैं। अधिकारियों के अनुसार इन परियोजनाओं के लिए वर्क ऑर्डर जारी कर दिए गए हैं और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि रोपवे बनने से तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ेगी और क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
व्यापारियों ने बताया कि यात्रा आसान होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
एआई बताएगा खराबी का संकेत
इस 3एस रोपवे प्रणाली में एआई आधारित स्मार्ट तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। सेंसर और कैमरों से मिलने वाले रीयल-टाइम डेटा का एआई विश्लेषण कर केबल, ब्रेक और ड्राइव सिस्टम में संभावित खराबी का पूर्वानुमान पहले ही लगा लिया जाएगा। इससे दुर्घटनाओं की आशंका काफी हद तक कम हो जाएगी।
3एस रोपवे की प्रमुख विशेषताएं
इस प्रणाली में गोंडोला केबिन पूरी तरह बंद, वातानुकूलित और मौसम-रोधी होंगे। कम टावरों के उपयोग से पर्यावरणीय प्रभाव भी न्यूनतम रहेगा। स्टेशन पर गोंडोला की गति कम और लाइन पर तेज रहेगी, जिससे यात्रा समय घटेगा। एक केबिन में 16 से 20 या उससे अधिक यात्री एक साथ सुरक्षित सफर कर सकेंगे। एंटी-आइसिंग तकनीक से बर्फबारी के दौरान भी निर्बाध संचालन संभव होगा।
आगे क्या?
राज्य सरकार के अनुसार निर्माण कार्य शुरू होते ही रोपवे परियोजनाओं की समयबद्ध निगरानी की जाएगी। इनके पूरा होने के बाद केदारनाथ और हेमकुंड साहिब की यात्रा न केवल तेज होगी, बल्कि देश की सबसे सुरक्षित तीर्थ यात्राओं में भी गिनी जाएगी।





