
देहरादून / दिल्ली — दिल्ली के रामलीला मैदान में आज कांग्रेस की महारैली आयोजित की जा रही है, जिसमें उत्तराखंड समेत देशभर से बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता शामिल हो रहे हैं। इस रैली को कांग्रेस नेतृत्व 2027 में होने वाले उत्तराखंड विधानसभा चुनावों की तैयारी के लिहाज से भी अहम मान रहा है। पार्टी का दावा है कि कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को लेकर आयोजित इस महारैली के जरिए जनता के बीच लोकतंत्र और चुनावी पारदर्शिता का संदेश दिया जाएगा। उत्तराखंड कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
कांग्रेस आने वाले समय में विभिन्न राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए लगातार राष्ट्रीय स्तर पर सक्रियता बढ़ा रही है। उत्तराखंड में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में पार्टी संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने के उद्देश्य से इस तरह के बड़े कार्यक्रमों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आधिकारिक जानकारी
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने बताया कि रामलीला मैदान में होने वाली महारैली के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि हर बूथ से कार्यकर्ता रैली में भाग ले रहे हैं। जो कार्यकर्ता अन्य राज्यों से एक दिन पहले दिल्ली पहुंचे हैं, उनके ठहरने और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। कांग्रेस सेवा दल और वॉलंटियर्स को तैनात किया गया है ताकि किसी को असुविधा न हो।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा की कथित वोट चोरी को लेकर पूरे दिल्ली में प्रचार किया गया है और सोशल मीडिया के साथ-साथ होर्डिंग, बैनर और पोस्टर लगाए गए हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
उत्तराखंड से पहुंचे कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह रैली पार्टी को नई ऊर्जा देगी।
कार्यकर्ताओं का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले इस तरह के आयोजन संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करेंगे।
आंकड़े / तथ्य
रैली में देशभर से हजारों कार्यकर्ताओं के शामिल होने का दावा किया गया है।
जम्मू-कश्मीर से 1027 कांग्रेसी रैली में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं।
झारखंड समेत कई राज्यों से भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं।
आगे क्या?
कांग्रेस नेतृत्व के अनुसार, इस महारैली के बाद राज्यों में संगठनात्मक गतिविधियों को और तेज किया जाएगा। उत्तराखंड में भी 2027 विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए जनसंपर्क अभियान और कार्यकर्ता सम्मेलन बढ़ाए जाने की संभावना है।





