
रामनगर: शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान बिजली और पानी के बिल कम या माफ होने की अफवाह फैलने से रामनगर कोर्ट परिसर में अचानक भारी भीड़ जुट गई। सोशल मीडिया और मौखिक चर्चाओं के जरिए फैली इस गलत सूचना के कारण सैकड़ों लोग अपने बिलों में राहत की उम्मीद में कोर्ट पहुंच गए, लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि ऐसी कोई व्यवस्था लोक अदालत में नहीं है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य आमतौर पर ट्रैफिक चालान, एक्साइज एक्ट और समझौता योग्य मामलों का निस्तारण करना होता है। लेकिन शनिवार को लोग यह मानकर कोर्ट पहुंच गए कि नियमित बिजली-पानी के घरेलू बिल भी इसमें माफ या कम किए जाएंगे।
अधिवक्ताओं ने दी स्पष्ट जानकारी
अधिवक्ता दीपक जोशी ने बताया कि लोक अदालत में घरेलू बिजली-पानी बिल कम करने या माफी देने का कोई नियम नहीं है। केवल बिजली चोरी, विभागीय मुकदमों या न्यायालय में लंबित मामलों पर ही सुनवाई की जाती है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में अधिकांश ट्रैफिक चालान वर्चुअल कोर्ट के माध्यम से निपटाए जा रहे हैं और कैमरे से कटने वाले चालानों का निस्तारण नैनीताल स्थित वर्चुअल कोर्ट में होता है। जानकारी के अभाव में लोग इन्हें रामनगर कोर्ट में निपटाने आ रहे हैं।
अधिवक्ता अतुल अग्रवाल का बयान
अधिवक्ता अतुल अग्रवाल ने कहा कि 13 दिसंबर को पूरे देश में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया है, लेकिन रामनगर में यह अफवाह फैल गई कि बिजली-पानी के नियमित बिल भी माफ होंगे। इस भ्रम के चलते सैकड़ों लोग कोर्ट आए, जबकि इस तरह के मामले यहां निपटाए ही नहीं जाते।
लोगों की दिक्कतें
अमिर नामक व्यक्ति ने बताया कि उन्होंने सुना था कि लोक अदालत में बिल कम किए जा रहे हैं, इसलिए वे पहुंचे थे। वहीं टेंपो चालक मोहम्मद फरीद की कैमरे से ₹5000 का चालान हुआ था, जिसे वे लोक अदालत में निपटाने आए थे। बाद में उन्हें बताया गया कि यह मामला केवल वर्चुअल कोर्ट नैनीताल में जमा होगा।
गलत सूचना और कम जानकारी के चलते बड़ी संख्या में लोग कोर्ट पहुंचे और बाद में निराश होकर लौटना पड़ा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
लोगों ने कहा कि इस तरह की अफवाहें जनता को भ्रमित करती हैं और अनावश्यक भीड़भाड़ पैदा करती हैं। कई लोगों ने कोर्ट परिसर में हुए अव्यवस्था के लिए सटीक जानकारी न मिलने को जिम्मेदार बताया।
आगे क्या?
अधिवक्ताओं ने सुझाव दिया है कि रामनगर में भी वर्चुअल कोर्ट की शाखा खोली जाए, ताकि ट्रैफिक चालानों का निस्तारण यहीं किया जा सके और लोगों को परेशानी न झेलनी पड़े। साथ ही प्रशासन को लोक अदालत के दायरे की जानकारी पहले से जागरूकता के रूप में जारी करने की सलाह दी गई है।







