
खटीमा। चंपावत जिले के लोहाघाट तहसील के धरगड़ा गांव में आदमखोर गुलदार का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को शौच के लिए घर से निकले ग्रामीण देव सिंह अधिकारी को गुलदार ने मार डाला था, जिसके बाद वन विभाग ने गांव में पिंजरे लगाकर उसे पकड़ने की कोशिश शुरू की। गुरुवार को गुलदार पिंजरे में घुसा जरूर, लेकिन दरवाजा लॉक न होने के कारण शिकार खाकर वापस जंगल की ओर भाग गया। इस विफलता के बाद ग्रामीणों में दहशत और नाराजगी दोनों बढ़ गई हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
धरगड़ा गांव और आसपास के क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से गुलदार की गतिविधियाँ बढ़ी हुई हैं। ग्रामीणों ने कई बार वन विभाग को इसकी जानकारी दी, लेकिन हालिया घटना ने पूरे इलाके में भय का माहौल खड़ा कर दिया है। जिस स्थान पर हमला हुआ, वहाँ अक्सर ग्रामीण सुबह-शाम आते-जाते हैं। लगातार हमलों की आशंका को देखते हुए वन विभाग ने तीन पिंजरे लगाए, ताकि गुलदार को सुरक्षित तरीके से पकड़ा जा सके।
आधिकारिक जानकारी
वन विभाग के रेंजर राजेश जोशी ने बताया कि गुरुवार की तड़के गुलदार पिंजरे में घुस गया था, लेकिन दरवाजा लॉक नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि यह विभाग के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि पिंजरा सक्रिय होते हुए भी गुलदार को कैद नहीं किया जा सका। उन्होंने आश्वासन दिया कि टीम लगातार गश्त कर रही है और गुलदार को जल्द पकड़ा जाएगा। जोशी ने ग्रामीणों से सावधानी बरतने की अपील की और कहा कि विभाग द्वारा रोजाना सुबह-शाम अतिरिक्त निगरानी की जा रही है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
गांव के लोगों में वन विभाग की लापरवाही को लेकर भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पिंजरा सही तरीके से काम करता तो इलाके को आतंक से राहत मिल सकती थी। सुबह जब लोग पिंजरे के पास पहुँचे, तो दरवाजा आधा खुला मिला और अंदर रखा शिकार पूरी तरह से गायब था। लोगों का कहना है कि आदमखोर गुलदार खुले में घूम रहा है और बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर वे बेहद चिंतित हैं। कई ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि यदि गुलदार को पकड़ना मुश्किल है, तो उसे आदमखोर घोषित कर कार्रवाई की जानी चाहिए।
विशेषज्ञ / अधिकारी की टिप्पणी
रेंजर राजेश जोशी ने कहा कि पिंजरे की विफलता एक बड़ी चूक रही, लेकिन टीम के प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि गुलदार को पकड़ने तक सतर्क रहना जरूरी है और विभाग हर संभव उपाय कर रहा है। जोशी ने बताया कि कुछ तकनीकी दिक्कतों की वजह से पिंजरा लॉक नहीं हुआ, लेकिन अब सुधार कर नए सिरे से ट्रैप लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
आंकड़े / तथ्य
घटना के बाद तीन मुख्य स्थानों पर पिंजरे लगाए गए हैं। वन विभाग की अलग-अलग टीमें क्षेत्र में लगातार गश्त कर रही हैं। स्कूल प्रशासन ने भी सुरक्षा के मद्देनज़र बच्चों के स्कूल समय में परिवर्तन किया है, ताकि बच्चे सुबह-शाम के खतरनाक समय में बाहर न आएँ।
आगे क्या?
वन विभाग ने गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजारों की संख्या बढ़ाने और रात के समय गश्त तेज करने का निर्णय लिया है। ग्रामीणों को समूह में चलने, अकेले जंगल या पगडंडियों पर न जाने और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। वन विभाग ने आश्वस्त किया है कि जल्द ही गुलदार को पकड़कर क्षेत्र को दहशत से मुक्त कराया जाएगा।





