
देहरादून: शहर के बीचों-बीच स्थित गोविंद नगर में वर्षों से जमा कूड़े का पहाड़ हटाने के लिए नगर निगम फिर सक्रिय हो गया है। कुंभ मेला नजदीक होने के कारण इस क्षेत्र को कूड़ा मुक्त बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। निगम ने 7.19 करोड़ रुपये की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) शासन को भेजी है, जबकि वर्तमान में यहां लगभग 1.30 लाख मिट्रिक टन कूड़ा जमा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
नगर पालिका से नगर निगम बनने के बावजूद देहरादून में अब तक आधुनिक कूड़ा निस्तारण प्रणाली विकसित नहीं हो पाई है। गोविंद नगर वर्षों से अस्थायी डंपिंग साइट के रूप में उपयोग होता रहा है और लगातार कूड़ा जमा होने से यह एक बड़े पहाड़ का रूप ले चुका है। गंगा से कम दूरी पर स्थित इस डंपिंग ज़ोन से उठने वाली बदबू और प्रदूषण आसपास के निवासियों के लिए गंभीर समस्या बना हुआ है। नगर निगम बीच-बीच में कूड़ा हटाता रहा है, लेकिन डंपिंग जारी रहने से समस्या जस की तस बनी हुई है।
अधिकारिक जानकारी
निगम ने अब नए सिरे से कूड़ा निस्तारण की डीपीआर तैयार कर शासन को वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति के लिए भेजी है। निगम के अनुसार गोविंद नगर में लगभग 1.30 लाख मिट्रिक टन कूड़ा उपस्थित है, जिसे कुंभ से पहले हटाने का लक्ष्य रखा गया है। ऋषिकेश भी कुंभ क्षेत्र में शामिल है और हरिद्वार आने वाले अनेक श्रद्धालु ऋषिकेश पहुंचते हैं, ऐसे में शहर का साफ-सुथरा दिखना आवश्यक माना जा रहा है।
निगम ने बताया कि यदि शासन से मंजूरी नहीं आती है तो वह अपने स्तर पर भी कूड़ा निस्तारण प्रक्रिया शुरू करेगा। दूसरी ओर लालपानी बीट में निर्माणाधीन कूड़ा निस्तारण प्लांट की धीमी गति भी परेशानी बढ़ा रही है। इस प्लांट को दिसंबर या जनवरी में शुरू करने की योजना थी, लेकिन कार्य पूरा न होने से यहां डंपिंग शुरू नहीं हो सकी है। निगम अब प्लांट निर्माण करने वाली कंपनी को अंतिम नोटिस देने की तैयारी कर रहा है, क्योंकि आगे चलकर ऋषिकेश, मुनिकीरेती, तपोवन, नरेंद्रनगर और स्वर्गाश्रम का कूड़ा भी इसी प्लांट में निस्तारित होना है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासियों ने बताया कि गोविंद नगर में जमा कूड़े से उठने वाली दुर्गंध ने जीवन कठिन कर दिया है। गर्मियों में कूड़े में आग लगने की घटनाएं भी होती हैं, जिससे दूर-दूर तक धुआं फैल जाता है। बरसात में कूड़े का बहकर सड़कों तक आ जाना लोगों के लिए और परेशानी पैदा करता है। आसपास के क्षेत्र, विशेषकर बनखंडी तक के लोग इस समस्या से लगातार जूझ रहे हैं।
विशेषज्ञ टिप्पणी
शहरी विकास विशेषज्ञों का कहना है कि कूड़ा निस्तारण व्यवस्था का वर्षों से लंबित रहना नगर निगम के लिए प्रशासनिक चुनौती बन गया है। कूड़े का पहाड़ न केवल पर्यावरणीय जोखिम बढ़ाता है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डालता है। उन्होंने कहा कि डीपीआर की मंजूरी और आधुनिक प्लांट का समय पर संचालन ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है।
संख्या और तथ्य
गोविंद नगर में लगभग 1.30 लाख मिट्रिक टन कूड़ा जमा है। नगर निगम ने 7.19 करोड़ रुपये की नई डीपीआर तैयार की है, जबकि पहले एक अन्य एजेंसी ने लगभग 26 करोड़ रुपये की डीपीआर बनाई थी, जिसे अधिक लागत के कारण आगे नहीं बढ़ाया गया। लालपानी बीट का कूड़ा निस्तारण प्लांट अभी भी निर्माणाधीन है और उसकी गति धीमी बताई जा रही है।
आगे क्या होगा
शासन से डीपीआर की मंजूरी मिलते ही कूड़े को चरणबद्ध तरीके से हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी। नगर निगम कुंभ से पहले क्षेत्र को कूड़ा मुक्त करने के लिए दबाव में है। यदि शासन की मंजूरी में देरी होती है तो निगम अपने स्तर पर कार्य शुरू करने की तैयारी कर रहा है। लालपानी प्लांट के समय पर चालू न होने से कूड़ा निस्तारण की चुनौतियाँ फिलहाल बनी रहेंगी।




