
ऋषिकेश से नीलकंठ महादेव तक प्रस्तावित रोपवे प्रोजेक्ट को नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्डलाइफ से केंद्रीय क्लीयरेंस मिल गई है। कार्यदायी संस्था उत्तराखंड मेट्रो कॉरपोरेशन को औपचारिक पत्राचार की प्रतीक्षा है, जिसके बाद प्रोजेक्ट की अगली तकनीकी और प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो जाएगी। यह प्रोजेक्ट क्षेत्रीय पर्यटन, आवागमन और स्थानीय रोजगार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
नीलकंठ महादेव आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती रही है। सड़क मार्ग पर ट्रैफिक दबाव, संकरी चढ़ाई और लंबा यात्रा समय यात्रियों के लिए चुनौती थी। 2020 में इस रोपवे का प्रस्ताव लाया गया ताकि श्रद्धालुओं को तेज, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल विकल्प उपलब्ध कराया जा सके। यह प्रोजेक्ट उत्तराखंड के पर्यटन विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अधिकारी / प्रशासनिक जानकारी
कार्यदायी संस्था का कहना है कि उन्हें NBWL क्लीयरेंस की सूचना मीडिया के माध्यम से प्राप्त हुई है। अधिकृत पत्र राज्य सरकार को 15 से 20 दिनों में मिलने की संभावना है। संस्था के अनुसार राज्य कैबिनेट पहले ही इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दे चुकी है और अब केवल औपचारिक पत्राचार बाकी है। अधिकारी बताते हैं कि जैसे ही पत्राचार पूरा होगा, प्रोजेक्ट की जमीन पर कार्रवाई तेजी से शुरू कर दी जाएगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि रोपवे शुरू होने से ऋषिकेश शहर में ट्रैफिक का दबाव कम होगा और नीलकंठ महादेव की यात्रा सरल हो जाएगी। व्यापारियों का मानना है कि इससे धार्मिक पर्यटन को बड़ा लाभ मिलेगा और आस-पास के क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
प्रोजेक्ट का इतिहास
11 जून 2020 को तत्कालीन मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में UMTA की बैठक में प्रस्ताव को स्वीकृति मिली थी। इसके बाद भारतीय पोर्ट रेल एवं रोपवे कॉरपोरेशन लिमिटेड के साथ फिजिबिलिटी रिपोर्ट के लिए MOU हुआ। 9 मई 2023 को राज्य कैबिनेट से प्रोजेक्ट को औपचारिक मंजूरी मिली और इसे फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए केंद्र को भेजा गया।
प्रोजेक्ट की तकनीकी डिटेल्स
यह रोपवे ऋषिकेश बस अड्डे और त्रिवेणी घाट से होते हुए नीलकंठ महादेव मंदिर तक प्रस्तावित है। इसमें दो मुख्य स्टेशन होंगे—पहला त्रिवेणी घाट और दूसरा नीलकंठ महादेव। दोनों के बीच क्षैतिज दूरी 4.1 किमी और ऊंचाई में अंतर 614 मीटर होगा। पूरे मार्ग में लगभग 21 टावर लगाए जाएंगे। प्रोजेक्ट पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल और प्रदूषण मुक्त परिवहन प्रणाली के तौर पर विकसित किया जा रहा है। रोपवे के माध्यम से श्रद्धालुओं को पहाड़ी दृश्यों और प्राकृतिक सौंदर्य का नजदीक से आनंद मिलेगा।
स्थानीय व सामाजिक महत्व
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वृद्ध, बच्चे और शारीरिक रूप से अक्षम लोग अक्सर नीलकंठ की चढ़ाई तय करने में कठिनाई महसूस करते हैं। रोपवे उनके लिए राहत का साधन बन सकता है। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट ऋषिकेश को वैश्विक धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत पहचान देगा।
आगे क्या होगा
अधिकृत क्लीयरेंस पत्र मिलने के बाद राज्य सरकार और कार्यदायी संस्था प्रोजेक्ट के निर्माण चरण की औपचारिक शुरुआत करेगी। उम्मीद है कि भूमि चिह्नांकन, तकनीकी सर्वे और शुरुआती तैयारी कार्य जल्द शुरू हो जाएंगे।







